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इजरायल के इलियट पोर्ट पर पहुंचा अमेरिकी विध्वंसक USS Delbert D. Black ,ईरान पर हमले की फाइनल तैयारी? जानें इस ‘समुद्री शिकारी’ की ताकत

News India Live, Digital Desk : खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब अपने चरम बिंदु पर पहुंच गया है। अमेरिका का गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक यूएसएस डेलबर्ट डी. ब्लैक (USS Delbert D. Black) शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को इजरायल के दक्षिणी बंदरगाह शहर इलियट (Eilat) पहुंच गया है। लाल सागर के मुहाने पर इस युद्धपोत की तैनाती को रणनीतिक जानकार ईरान पर संभावित हमले के ‘काउंटडाउन’ के रूप में देख रहे हैं।क्यों खास है इलियट पोर्ट पर यह तैनाती?आमतौर पर अमेरिकी युद्धपोत भूमध्य सागर या फारस की खाड़ी में तैनात रहते हैं, लेकिन इलियट में लंगर डालना एक बड़ा संदेश है:रणनीतिक स्थिति: इलियट इजरायल का वह छोर है जहाँ से लाल सागर और यमन के हूती विद्रोहियों पर सीधी नजर रखी जा सकती है।साझा मोर्चा: इजरायली सेना (IDF) ने इस दौरे को ‘पूर्व-नियोजित और नियमित’ बताया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के ‘ज्वाइंट वार प्लान’ का हिस्सा है।USS Delbert D. Black: क्या है इस युद्धपोत की खासियत?यह अर्ले बर्क-क्लास (Arleigh Burke-class) का विध्वंसक जहाज है, जिसे ‘समुद्र का अजय योद्धा’ माना जाता है।फीचरक्षमता और ताकतएजिस कॉम्बैट सिस्टमयह एक साथ हवा, पानी और ज़मीन से आने वाले दर्जनों खतरों को ट्रैक कर उन्हें तबाह कर सकता है।टोमहॉक मिसाइलेंयह लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों से लैस है, जो ईरान के अंदरूनी हिस्सों में सटीक हमला कर सकती हैं।मिसाइल डिफेंसयह दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने में सक्षम है।मौजूदगीइसके शामिल होने से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या अब 10 हो गई है।ट्रंप का ‘आर्माडा’ और ईरान की तैयारीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान की ओर एक ‘विशाल आर्माडा’ (Massive Armada) भेजने का दावा किया था।एयरक्राफ्ट कैरियर: यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) पहले ही अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ क्षेत्र में पहुंच चुका है।ईरान का पलटवार: जवाब में ईरान ने भी अपनी सेना और आईआरजीसी (IRGC) को हाई अलर्ट पर रखा है। ईरानी मीडिया का दावा है कि उनके पास ‘1,000 नए घातक ड्रोन’ तैयार हैं और उनकी ‘उंगली ट्रिगर पर’ है।गठबंधन: रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान पर हमले का ब्लूप्रिंट इजरायल, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ साझा कर दिया है।क्या टल सकता है महायुद्ध?राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह तैनाती ‘प्रतिरोध’ (Deterrence) की एक कोशिश भी हो सकती है, ताकि ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जा सके। हालांकि, जिस तरह से इलियट जैसे संवेदनशील पोर्ट का उपयोग किया जा रहा है, वह संकेत देता है कि यदि कूटनीति विफल रही, तो 2026 का सबसे बड़ा सैन्य टकराव अब कुछ ही घंटों की दूरी पर है।