
News India Live, Digital Desk : कानपुर के सिविल लाइंस स्थित रजिस्ट्री कार्यालयों (सब-रजिस्ट्रार जोन-1 और जोन-3) में आयकर विभाग की ‘इन्वेस्टिगेशन विंग’ ने एक के बाद एक बड़ी कार्रवाई की है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों (2020-2025) के रिकॉर्ड की जांच में करीब ₹3,500 करोड़ से ₹4,000 करोड़ तक की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। इस घोटाले ने शासन से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है।1. कैसे खुला ‘4000 करोड़’ का राज? (The Investigation)आयकर विभाग को ‘स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन’ (SFT) के मिलान के दौरान डेटा में भारी विसंगतियां मिली थीं।डेटा मिसमैच: रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा ऑनलाइन अपलोड किए गए डेटा और भौतिक दस्तावेजों (Physical Records) के बीच भारी अंतर पाया गया।छापेमारी: आयकर अधिकारियों ने जोन-1 और फिर जोन-3 के कार्यालयों में 6-6 घंटे तक सर्वे किया, जिसमें ₹2,500 करोड़ और ₹1,000 करोड़ के अलग-अलग घपले सामने आए।2. घोटाले के ‘3 बड़े पैंतरे’ (Modus Operandi)जांच में सामने आया है कि सरकारी राजस्व को चूना लगाने के लिए इन तरीकों का इस्तेमाल किया गया:धांधली का तरीकाविवरणअसरफर्जी PAN कार्डलगभग 1,000 से ज्यादा रजिस्ट्रियों में फर्जी या मनमर्जी से भरे हुए PAN नंबर लिखे गए।बेनामी संपत्तियों और काले धन को छिपाने की कोशिश।मूल्य में कमीसंपत्ति की वास्तविक कीमत को सरकारी रिकॉर्ड में बहुत कम दिखाया गया।स्टैम्प ड्यूटी और आयकर की चोरी।गलत मोबाइल नंबरक्रेता-विक्रेता के गलत संपर्क विवरण दर्ज किए गए ताकि आयकर विभाग उन तक न पहुँच सके।पहचान छिपाकर करोड़ों के सौदे।3. सरकार को कितना हुआ नुकसान?शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस हेराफेरी से आयकर विभाग को करीब ₹800 करोड़ से ₹1,000 करोड़ के प्रत्यक्ष टैक्स का चूना लगा है। इसके अलावा, स्टैम्प ड्यूटी की चोरी का आंकड़ा भी करोड़ों में होने का अनुमान है।4. जिम्मेदार अधिकारियों पर ‘डेडलाइन’ की तलवारआयकर विभाग ने रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारियों और बाबूओं को 10 दिन का समय दिया है कि वे लापता दस्तावेजों और संदिग्ध PAN प्रविष्टियों का स्पष्टीकरण दें। यदि वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते, तो संबंधित रजिस्ट्रार और कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई और FIR दर्ज की जा सकती है।केडीए (KDA) के भ्रष्टाचार से भी जुड़ रहे तार?कानपुर में केवल रजिस्ट्री विभाग ही नहीं, बल्कि केडीए (Kanpur Development Authority) में भी पिछले दिनों रिश्वत लेकर रजिस्ट्री लटकाने और फर्जी दस्तावेजों पर प्लॉट बेचने के मामले सामने आए हैं। जिलाधिकारी (DM) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टालरेंस’ की नीति अपनाते हुए कड़ी निगरानी के आदेश दिए हैं।
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