News India Live, Digital Desk : बॉलीवुड में नेपोटिज्म (Nepotism) एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कभी बहस खत्म नहीं होती। आम पब्लिक के तौर पर हम अक्सर यही सोचते हैं कि स्टार किड्स की लाइफ कितनी बढ़िया है—चम्मच में चांदी लेकर पैदा होते हैं, पापा एक फ़ोन करते हैं और बड़ी फिल्म मिल जाती है। न कोई संघर्ष, न कोई लाइन में लगना।
लेकिन, क्या सिक्के का दूसरा पहलू वाकई इतना ही चमकदार है?
हाल ही में मशहूर एक्टर और डांसर जावेद जाफरी (Jaaved Jaaferi) के बेटे मीजान जाफरी (Meezaan Jafri) ने इस मुद्दे पर बहुत खुलकर और ईमानदारी से बात की है। उनका कहना है कि बाहर से जो चीज़ ‘ग्लैमरस’ दिखती है, अंदर से वो एक बहुत बड़े “बोझ” (Burden) की तरह होती है।
“विरासत का बोझ बहुत भारी होता है”
मीजान जाफरी सिर्फ एक स्टार किड नहीं, बल्कि तीसरी पीढ़ी के एक्टर हैं। उनके दादा जी महान कॉमेडियन जगदीप साहब (सूरमा भोपाली) थे और पिता जावेद जाफरी अपने डांस और कॉमेडी के लेजेंड हैं।
मीजान ने एक इंटरव्यू में अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि एक ऐसे परिवार से आना गर्व की बात तो है, लेकिन साथ ही यह एक बहुत बड़ा ‘बैगेज’ (Baggage) भी है।
उन्होंने कहा, “लोग आपको सिर्फ आपके काम से नहीं आंकते, बल्कि आपकी तुलना आपके बाप-दादा से करते हैं। वो उम्मीद करते हैं कि आप पहले दिन से ही लीजेंड होंगे। यह दबाव (Pressure) कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है।”
“हां, एंट्री आसान है, लेकिन टिकना नहीं”
मीजान ने बहुत ही सुलझे हुए अंदाज़ में अपनी ‘प्रिविलेज’ को स्वीकारा भी। उन्होंने साफ़ कहा, “मैं झूठ नहीं बोलूंगा, एक स्टार किड होने के नाते हमें इंडस्ट्री के लोगों तक पहुंचना आसान होता है। पहली मीटिंग आसानी से मिल जाती है, जो कि आउटसाइडर्स के लिए बहुत मुश्किल है।”
लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता है। मीजान का कहना है कि दरवाजा खुलने के बाद कैमरा तो आपको ही फेस करना है। अगर टैलेंट नहीं है, तो ऑडियंस आपको एक सेकंड में नकार देगी, चाहे आप किसी के भी बेटे हों। उस “निरंतर तुलना” (Constant Comparison) के बीच अपनी अलग पहचान बनाना, लोहे के चने चबाने जैसा है।
अब क्या कर रहे हैं मीजान?
मीजान को हम ‘मलाल’ और ‘हंगामा 2’ जैसी फिल्मों में देख चुके हैं। फिलहाल वे अपने अगले बड़े प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में हैं। वो जल्द ही एक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म ‘मिडाक एली’ (Midaq Alley) में नज़र आने वाले हैं।
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