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बिहार में गरीबों के निवाले पर बड़ा डाका! FCI गोदाम से 324 क्विंटल सरकारी अनाज का ‘महा-घोटाला’ उजागर

बिहार में जन वितरण प्रणाली (PDS) और सरकारी राशन व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक अमले ने एक बेहद बड़ी और हड़कंप मचा देने वाली कार्रवाई की है। सूबे के गरीब परिवारों के हक के राशन पर डाका डालने वाले एक बहुत बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के एक मुख्य गोदाम में बड़े पैमाने पर अनाज की हेराफेरी और कालाबाजारी का सनसनीखेज खेल उजागर हुआ है। औचक निरीक्षण और सघन जांच के दौरान गोदाम से करीब 324 क्विंटल सरकारी चावल और गेहूं रहस्यमय तरीके से गायब पाए गए हैं। इस महा-घोटाले के सामने आते ही जिला प्रशासन से लेकर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मुख्यालय तक हड़कंप मच गया है। गोपनीय सूचना पर आधी रात को गूंजा गोदाम, अधिकारियों की टीम ने जब गिरे बोरे तो उड़े होश मिली जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को पिछले कई दिनों से लगातार गोपनीय इनपुट मिल रहे थे कि एफसीआई गोदाम से सरकारी खाद्यान्न को रात के अंधेरे में निजी डीलरों और खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इसी पुख्ता सूचना के आधार पर प्रशासनिक अधिकारियों, कमोडिटी एक्सपर्ट्स और भारी पुलिस बल की एक संयुक्त टीम ने देर रात गोदाम परिसर की घेराबंदी कर अचानक छापेमारी कर दी। जब टीम ने गोदाम के भीतर मौजूद स्टॉक का मिलान सरकारी पंजी (रजिस्टर) से करना शुरू किया और एक-एक बोरे की गिनती की, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। कागजों पर जो अनाज गोदाम में सुरक्षित होना चाहिए था, उसमें से 324 क्विंटल अनाज जमीन से पूरी तरह गायब था। फर्जी एंट्री और सरकारी कागजों में हेरफेर कर चल रहा था कालाबाजारी का यह रैकेट शुरुआती जांच में यह बात साफ हो गई है कि यह घोटाला किसी एक दिन की चूक नहीं है, बल्कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चल रहा था। गोदाम प्रबंधन और बिचौलियों की मिलीभगत से सरकारी ट्रकों में अनाज की लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान फर्जी एंट्री की जा रही थी। गरीबों को बांटे जाने वाले इस राशन को ट्रकों के जरिए सीधे निजी मिलों और कालाबाजारियों के ठिकानों पर डंप किया जा रहा था। जांच टीम ने मौके से कई संदिग्ध दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और डिजिटल तौल मशीनों के रिकॉर्ड को अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि पिछले छह महीनों के रिकॉर्ड को खंगाला जाए, तो यह घोटाला कई हजार क्विंटल तक पहुंच सकता है। गोदाम मैनेजर सहित कई बड़ी मछलियों पर गिरेगी गाज, प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश प्रशासन ने इस पूरे मामले को गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला मानते हुए बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। जिलाधिकारी (DM) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित एफसीआई गोदाम प्रबंधक (Warehouse Manager), सहायक गोदाम प्रभारी और परिवहन ठेकेदारों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है और आगामी आदेश तक वहां से किसी भी प्रकार के अनाज के उठाव पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पुलिस ने मामले में शामिल कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है। राशन माफियाओं की अब खैर नहीं, पूरे जिले के सरकारी गोदामों का होगा ऑडिट इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गरीबों के राशन की कालाबाजारी करने वाले राशन माफियाओं को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस बड़े खेल के उजागर होने के बाद अब जिले के अन्य सभी सरकारी खाद्यान्न गोदामों और जन वितरण प्रणाली की दुकानों (PDS Shops) का भी रैंडम डिजिटल ऑडिट कराने का फैसला लिया गया है। सरकार अब अनाज के ट्रकों पर जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत करने जा रही है ताकि गोदाम से निकलने वाले अनाज की एक-एक बोरी सीधे गरीब उपभोक्ताओं तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके। इस चौतरफा कार्रवाई से पूरे राज्य के भ्रष्ट अधिकारियों और जमाखोरों के बीच भारी दहशत का माहौल है।