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लखनऊ में हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड, जनकपुरी के दो वैज्ञानिकों के खाते से एक ही तरीके से उड़े 3.81 लाख

News India Live, Digital Desk: साइबर अपराधी इन दिनों हर किसी को अपना निशाना बना रहे हैं, फिर चाहे वह आम इंसान हो या कोई हाई-प्रोफाइल और पढ़े-लिखे व्यक्ति। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow, UP) में साइबर क्राइम का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहांजनकपुरी इलाके में रहने वाले दो प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को एक ही तरह के फ्रॉड (Fraud) का शिकार बनाया गया।सबसे चिंता की बात यह है कि साइबर ठगों ने सिर्फ कुछ घंटों के अंदर दोनों वैज्ञानिकों के बैंक अकाउंट से₹3.81 लाख रुपये की बड़ी रकम उड़ा ली। ये दोनों वैज्ञानिक एक दूसरे को जानते थे और धोखाधड़ी की इस पूरी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।कैसे हुई ये हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी?ये दोनों वैज्ञानिक केंद्र सरकार के किसी प्रतिष्ठित संस्थान (माना जा रहा है कि एक स्पेस या रिसर्च लैब) से जुड़े हैं। फ्रॉड का तरीका वही था जो आजकल सबसे ज़्यादा चल रहा है: फिशिंग (Phishing) और मैलवेयर का इस्तेमाल।पहला मामला (Scientist 1):पहले वैज्ञानिक को एक लिंक वाला मैसेज मिला। लिंक किसी सरकारी सब्सिडी या निजी सूचना अपडेट से संबंधित हो सकता था। जैसे ही उन्होंने लिंक पर क्लिक किया या कोई एप्लीकेशन डाउनलोड किया, ठगों ने तुरंत उनके फोन का क्लोन (Clone) बना लिया या मैलवेयर के जरिए उनका डेटा और बैंकिंग डिटेल्स हासिल कर लीं। कुछ ही मिनटों में उनके खाते से मोटी रकम उड़ा ली गई।दूसरा मामला (Scientist 2):दूसरे वैज्ञानिक के साथ भी लगभग वैसी ही घटना हुई। फ्रॉडस्टर्स ने बिल्कुल समान तरीके का इस्तेमाल किया और जाल में फंसा लिया।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन ठगी के पीछे की मास्टरप्लानइस मामले में दोनों वैज्ञानिकों को एक ही तरह से ठगा जाना दिखाता है कि साइबर ठग बहुत संगठित तरीके से काम कर रहे हैं और खास प्रोफाइल्स (सरकारी या वैज्ञानिक क्षेत्र) के लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिन्हें अक्सर माना जाता है कि वे टेक्नोलॉजी को समझते होंगे।रिमोट एक्सेस और ओटीपी बाइपास: लिंक पर क्लिक करवाते ही, फ्रॉडस्टर डिवाइस का रिमोट एक्सेस (Remote Access) हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे चुपचाप ओटीपी (OTP) को बाईपास कर सकते हैं या बिना यूजर की जानकारी के ट्रांसक्शन्स कर देते हैं।<h3>वैज्ञानिकों ने उठाया सवाल, पुलिस कर रही जांच</h3>इतनी बड़ी रकम गंवाने के बाद दोनों वैज्ञानिकों ने लखनऊ के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।वैज्ञानिकों ने आश्चर्य जताया है कि फ्रॉडस्टर्स इतनी आसानी से सुरक्षा घेरे को कैसे तोड़ रहे हैं, जबकि वे हमेशा सतर्क रहते हैं। साइबर पुलिस स्टेशन के अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, उन बैंक खातों और मोबाइल नंबर्स की पड़ताल कर रहे हैं जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इन शातिर साइबर अपराधियों का पता चलेगा।