वाराणसी जनपद के चोलापुर क्षेत्र के मुनारी, बाबतपुर और आसपास के इलाकों में सड़कों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाती नीलम देवी आज केवल यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने का काम नहीं कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और हौसले की प्रेरक मिसाल बन चुकी हैं। कभी यह सवाल उनके सामने था कि क्या एक महिला ई-रिक्शा चलाकर अपना रोजगार खड़ा कर सकती है, लेकिन आज उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने इस सवाल का जवाब खुद दे दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के कुशल नेतृत्व में सरकार द्वारा महिलाओं के लिए समूहों के माध्यम से दी जा रही सुविधाओं सहायता से वे विभिन्न उद्यम अपनाकर आत्मनिर्भर हो रही है। श्रीमती नीलम देवी विकास स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं तथा नारी शक्ति महिला प्रेरणा महिला संकुल समिति से संबद्ध हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके सामने आजीविका के नए अवसरों की राह खुली और उन्होंने पारंपरिक कामों से आगे बढ़कर अपना स्वयं का रोजगार शुरू करने का साहस किया।
आज श्रीमती नीलम देवी प्रतिदिन लगभग छह से सात घंटे ई-रिक्शा चलाती हैं और औसतन 800 से 900 रुपये प्रतिदिन की आय अर्जित करती हैं। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 25 से 30 हजार रुपये तथा वार्षिक आय लगभग 3 से 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इस आय से वह परिवार के घरेलू खर्च में सहयोग करने के साथ ही अपने बच्चों की शिक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनकी आर्थिक स्थिति में आया यह बदलाव उनके पूरे परिवार के लिए आत्मविश्वास और सम्मान का कारण बना है। ई-रिक्शा चलाने का निर्णय लेना नीलम देवी के लिए आसान नहीं था। जब उन्होंने इस काम को शुरू करने की इच्छा व्यक्त की तो समाज के कुछ लोगों ने सवाल उठाए। किसी ने उनकी क्षमता पर संदेह किया तो किसी ने यह कहकर हतोत्साहित किया कि ई-रिक्शा चलाना महिलाओं के लिए उचित काम नहीं है। इन बातों ने कभी-कभी उनके आत्मविश्वास को जरूर प्रभावित किया, लेकिन परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने की उनकी इच्छा इससे कहीं अधिक मजबूत थी।
नीलम देवी ने खुद को एक अवसर देने का निर्णय लिया और आदर्श इंटर कॉलेज ग्राउंड में आयोजित ड्राइविंग प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने वाहन चलाने की बारीकियां सीखीं और धीरे-धीरे उनके भीतर का डर आत्मविश्वास में बदलता गया। प्रत्येक प्रशिक्षण के साथ उनका विश्वास मजबूत होता गया कि वह अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बना सकती हैं। इस यात्रा में उन्हें डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स का सहयोग भी मिला। संस्था की ओर से उन्हें ड्राइविंग प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, व्यवसाय पंजीकरण, ऋण आवेदन, वाहन के रखरखाव, रूट मैपिंग, बैंकिंग प्रक्रियाओं तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं मार्गदर्शन मिला। इस निरंतर सहयोग ने उन्हें ई-रिक्शा व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया को समझने और हर कदम पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद की।
अपने सपने को साकार करने के लिए नीलम देवी ने लगभग 2.40 लाख रुपये का माइक्रोफाइनेंस ऋण लिया और अपनी ई-रिक्शा खरीदी। ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से लेकर वाहन खरीदने तक मिली तकनीकी एवं वित्तीय सहायता ने उनके सपने को हकीकत में बदल दिया। यह उनके जीवन का वह महत्वपूर्ण मोड़ था, जब उन्होंने रोजगार तलाशने के बजाय स्वयं रोजगार सृजित करने का रास्ता चुना। ई-रिक्शा लेकर सड़क पर उतरने के शुरुआती दिन उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहे। भीड़भाड़ वाले रास्तों पर वाहन चलाना, यात्रियों का विश्वास हासिल करना और समाज की हतोत्साहित करने वाली बातों का सामना करना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन नीलम देवी ने हार नहीं मानी। उन्होंने हर चुनौती को सीखने का अवसर बनाया और निरंतर मेहनत करते हुए अपने काम में दक्षता हासिल की। समय के साथ यात्रियों का भरोसा भी बढ़ता गया। उनकी सुरक्षित और जिम्मेदार सेवा के कारण क्षेत्र के लोग उन्हें पहचानने लगे। जो महिला कभी यह सोचकर आशंकित थीं कि वह ई-रिक्शा चला पाएंगी या नहीं, वही आज अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं और प्रतिदिन अपनी मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं।
श्रीमती नीलम देवी की सफलता का असर उनके परिवार तक ही सीमित नहीं रहा। उनके पति, जो शुरुआत में उनके इस निर्णय को लेकर आशंकित थे, आज उनके सबसे बड़े समर्थकों में शामिल हैं और उनकी उपलब्धि पर गर्व करते हैं। परिवार के लिए नीलम अब केवल गृहिणी नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी हैं। प्रदेश सरकार की ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह योजना केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम भी बन रहे हैं। प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग, सही मार्गदर्शन और स्वयं पर विश्वास के साथ महिलाएं अपनी परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखती हैं। आज नीलम देवी की सफलता को केवल उनकी 25 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह की आय से नहीं मापा जा सकता। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि उनका बढ़ा हुआ आत्मविश्वास है। उन्होंने उस सामाजिक सोच को चुनौती दी, जिसमें महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों को सीमित समझा जाता है। उनकी सफलता ने गांव की दूसरी महिलाओं को भी अपने लिए नए आजीविका विकल्प तलाशने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है। उनकी यह यात्रा डर से आत्मविश्वास, निर्भरता से आत्मनिर्भरता और एक अवसर की तलाश से स्वयं रोजगार सृजन तक के बदलाव की प्रेरक कहानी है।
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