अब आप अपने ईपीएफ खाते से पूरी राशि निकाल सकेंगे। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सोमवार को हुई केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में यह फैसला लिया। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई बड़े और आश्वस्त करने वाले फैसले लिए गए। इससे ईपीएफ खाते से रकम निकालना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके यह जानकारी साझा की। उन्होंने बैठक में लिए गए अहम फैसलों की जानकारी दी और एक प्रेस विज्ञप्ति भी साझा की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, हम ईपीएफ सदस्यों के जीवन को आसान बनाने और नियोक्ताओं के लिए कारोबार को आसान बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।”
Chaired the 238th meeting of Central Board of Trustees of EPFO.
Under the leadership of PM Shri @NarendraModi ji, we are ensuring ease of living for members and ease of doing business for employers.
Key decision taken ????
???? https://t.co/Tg3cJ6EMUo pic.twitter.com/3RS1c4lqrX
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) October 13, 2025
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय:
ईपीएफओ ने पहले के 13 कठोर नियमों को खत्म कर दिया है और अब केवल तीन श्रेणियों में आंशिक निकासी की अनुमति देता है: आवश्यक ज़रूरतें (बीमारी, शिक्षा, विवाह, जीवनयापन का खर्च और विशेष परिस्थितियाँ)। सदस्य अब अपने पीएफ खाते में जमा पूरी राशि निकाल सकेंगे।
- विवाह के लिए निकासी की सीमा – पहले शिक्षा और विवाह के लिए केवल तीन निकासी की अनुमति थी, लेकिन अब शिक्षा के लिए 10 और विवाह के लिए पाँच निकासी की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम सेवा अवधि, जो पहले अलग-अलग ज़रूरतों के अनुसार अलग-अलग होती थी, को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है।
- निकासी सुविधा – पहले, प्राकृतिक आपदाओं, बेरोज़गारी या महामारी जैसी विशेष परिस्थितियों में निकासी के लिए कारण बताना पड़ता था, जिसके कारण अक्सर दावे खारिज हो जाते थे। अब यह झंझट खत्म हो गई है। सदस्य विशेष परिस्थितियों में बिना कोई कारण बताए निकासी कर सकेंगे।
- 25% न्यूनतम सीमा – ईपीएफओ ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सदस्य अपने खाते में हमेशा 25% की न्यूनतम राशि बनाए रखें। इससे सदस्यों को 8.25% की ब्याज दर और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलेगा, जिससे वे एक अच्छा रिटायरमेंट फंड बना सकेंगे।
- ऑटो-सेटलमेंट सिस्टम – नए नियमों के तहत, किसी भी दस्तावेज़ को जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। निकासी प्रक्रिया पूरी तरह से स्वचालित होने वाली है, जिससे दावों के निपटान में तेज़ी आएगी। समय से पहले अंतिम निपटान की अवधि दो महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है, और पेंशन निकासी की अवधि दो महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दी गई है।
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