
News India Live, Digital Desk : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत के बाद महबूबा मुफ्ती ने इसे “इतिहास का एक काला और शर्मनाक अध्याय” करार दिया है। उन्होंने न केवल इस हमले की निंदा की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया।”नेतन्याहू एक क्रिमिनल हैं” : महबूबा का तीखा प्रहारमहबूबा मुफ्ती ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे तौर पर निशाने पर लिया। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:युद्ध अपराधी (War Criminal): महबूबा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने पहले ही नेतन्याहू के खिलाफ कड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने उन्हें एक ऐसा “अपराधी” बताया जो गिरफ्तारी के डर से कई देशों की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं।पीएम मोदी पर निशाना: उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नेतन्याहू से मुलाकात और उन्हें गले लगाने पर भी सवाल उठाए। महबूबा के अनुसार, “गांधी के भारत” के प्रतिनिधि का एक ऐसे व्यक्ति के साथ खड़ा होना सही संकेत नहीं है जिसे दुनिया ‘गुनहगार’ मानती है।मुस्लिम देशों की ‘चुप्पी’ पर नाराजगीखामेनेई की मौत के बाद कई मुस्लिम देशों के रुख पर भी महबूबा ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि:यह देखकर दुख होता है कि कई मुस्लिम राष्ट्रों ने अपनी अंतरात्मा के बजाय सुविधा और राजनीतिक हितों (Convenience over Conscience) को चुना है।उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि समय आने पर यह याद रखा जाएगा कि किसने न्याय के लिए लड़ाई लड़ी और किसने ‘अत्याचारियों’ का साथ दिया।कश्मीर में विरोध की लहर और महबूबा की अपीलखामेनेई की मौत की खबर के बाद कश्मीर के कई हिस्सों (श्रीनगर, बडगाम, बारामूला) में विरोध प्रदर्शन हुए हैं।एकजुटता: महबूबा ने ईरान के लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और उनके धैर्य की सराहना की।सुरक्षा की मांग: उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि ईरान और खाड़ी देशों में फंसे कश्मीर सहित पूरे भारत के छात्रों और नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।राजनीतिक गलियारों में हलचलमहबूबा मुफ्ती के इस बयान के बाद भाजपा ने भी उन पर पलटवार किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि महबूबा मुफ्ती हमेशा पड़ोसी देशों या विदेशी मुद्दों पर बयान देकर कश्मीर में भावनाएं भड़काने की कोशिश करती हैं। हालांकि, महबूबा का तर्क है कि वह केवल ‘मानवता’ और ‘न्याय’ के पक्ष में खड़ी हैं।
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