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नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, खराब खान-पान और प्रदूषण का सीधा असर पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर पड़ रहा है। अक्सर देखा जाता है कि शादी के लंबे समय बाद भी जब दंपत्ति को संतान सुख नहीं मिलता, तो सारा ध्यान केवल महिला की जांच पर केंद्रित कर दिया जाता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान कहता है कि करीब 40 से 50 प्रतिशत मामलों में ‘मेल इनफर्टिलिटी’ (पुरुष बांझपन) मुख्य कारण होती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि एक सफल गर्भधारण के लिए पुरुष के स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या का पैमाना क्या है।WHO के अनुसार कितना होना चाहिए ‘नॉर्मल स्पर्म काउंट’?विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक स्वस्थ पुरुष के लिए स्पर्म रिपोर्ट (Semen Analysis) के कुछ मानक तय किए हैं:शुक्राणुओं की संख्या (Sperm Count):एक मिलीलीटर वीर्य (Semen) में कम से कम 15 मिलियन (1.5 करोड़) से अधिक शुक्राणु होने चाहिए। यदि संख्या इससे कम है, तो इसे ‘ओलिगोस्पर्मिया’ (Oligospermia) कहा जाता है, जिससे गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।गतिशीलता (Sperm Motility):केवल संख्या ही काफी नहीं है, शुक्राणुओं का गतिशील होना भी जरूरी है ताकि वे अंडे तक पहुंच सकें। कुल शुक्राणुओं में से कम से कम 40% गतिशील होने चाहिए और उनमें से 32% तेजी से आगे बढ़ने वाले (Progressive Motility) होने चाहिए।बनावट (Sperm Morphology):शुक्राणुओं का आकार भी सही होना चाहिए। सामान्य रिपोर्ट में कम से कम 4% शुक्राणु पूरी तरह से सामान्य आकार (Normal Shape) के होने चाहिए।वीर्य की मात्रा (Semen Volume):एक बार के स्खलन (Ejaculation) में वीर्य की मात्रा कम से कम 1.5 ml होनी चाहिए।स्पर्म काउंट कम होने के मुख्य कारणअत्यधिक तनाव: मानसिक तनाव हार्मोनल संतुलन बिगाड़ देता है।नशीले पदार्थों का सेवन: धूम्रपान, शराब और ड्रग्स शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।मोटापा: शरीर का अधिक वजन टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम कर देता है।गर्मी का प्रभाव: टाइट कपड़े पहनना या लैपटॉप को लंबे समय तक जांघों पर रखकर काम करना अंडकोष के तापमान को बढ़ा देता है, जो स्पर्म के लिए घातक है।बीमारियां: वैरिकोसेल (Varicocele), डायबिटीज या कोई पुराना संक्रमण।शुक्राणुओं की गुणवत्ता सुधारने के प्राकृतिक तरीकेडाइट में बदलाव: जिंक, विटामिन-सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें खाएं। अखरोट, कद्दू के बीज, अंडा, पालक और खट्टे फल बहुत फायदेमंद हैं।अश्वगंधा और सफेद मूसली: आयुर्वेद में इन जड़ी-बूटियों को शुक्र धातु बढ़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।नियमित व्यायाम: शारीरिक सक्रियता से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है, लेकिन बहुत अधिक भारी व्यायाम से बचें।पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद हार्मोनल संतुलन के लिए अनिवार्य है।
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