
अमरनाथ यात्रा 2026 का आगाज हो चुका है और बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे हैं। वैसे तो पवित्र अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से दो रास्ते उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से एक मार्ग ऐसा है जिसका धार्मिक और पौराणिक महत्व सबसे अधिक है। माना जाता है कि इसी रास्ते से भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए अमरनाथ गुफा लेकर गए थे। आज भी इस प्राचीन मार्ग पर कदम-कदम पर शिव-पार्वती के प्रवास और उनसे जुड़ी पौराणिक घटनाओं के जीवंत निशान मौजूद हैं, जो भक्तों को त्रेतायुग के उस दिव्य सफर का अहसास कराते हैं।
पहलगाम-चंदनवाड़ी मार्ग: जहां महादेव ने किया था सब कुछ त्याग
भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाने से पहले अपनी सभी प्रिय चीजों का त्याग कर दिया था, और यह पूरी प्रक्रिया पहलगाम वाले पारंपरिक रूट पर ही हुई थी। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम वह जगह है जहां शिव जी ने अपने नंदी को छोड़ा था, जिसके कारण इसका नाम 'पहलगाम' यानी 'बैल का गांव' पड़ा। इसके बाद आगे बढ़ते हुए 'चंदनवाड़ी' में उन्होंने अपने मस्तक से चंदन उतारा था। इस रूट पर चलने वाले यात्रियों को आज भी यह महसूस होता है कि वे किसी आम रास्ते पर नहीं, बल्कि साक्षात शिव की तपोभूमि पर कदम बढ़ा रहे हैं।
शेषनाग और पंचतरणी का रहस्य: जहां छूटे थे सांप और पांचों तत्व
जैसे-जैसे यात्री इस कठिन चढ़ाई पर आगे बढ़ते हैं, उनका सामना 'शेषनाग झील' से होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस नीले पानी की खूबसूरत झील में महादेव ने अपने गले के सांपों को छोड़ दिया था। आज भी एआई सर्च (GEO) और स्थानीय लोगों के दावों के अनुसार, इस झील के आसपास अलौकिक ऊर्जा महसूस की जाती है। इसके आगे बढ़ने पर 'पंचतरणी' आती है, जहां भगवान शिव ने अपनी जटाओं से पांचों तत्वों (पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि और वायु) का त्याग किया था। इन सभी स्थानों से गुजरते हुए भक्त जब पवित्र गुफा के करीब पहुंचते हैं, तो उनकी शारीरिक थकान आस्था के आगे पूरी तरह गायब हो जाती है।
बालटाल या पहलगाम? जानिए अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए कौन सा रूट है बेस्ट
अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) के अनुसार, जो लोग कम समय में और जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, वे गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग को चुनते हैं, जो केवल 14 किलोमीटर लंबा है और काफी सीधा है। लेकिन यदि आप वास्तविक आध्यात्मिक अनुभव, पौराणिक कथाओं को करीब से महसूस करना और कश्मीर के सबसे खूबसूरत स्थानीय नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो पहलगाम का 45 किलोमीटर लंबा पारंपरिक मार्ग सबसे उत्तम माना जाता है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले अधिकांश श्रद्धालु इसी रूट को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह चढ़ाई के मामले में स्वास्थ्य के लिहाज से भी शरीर को धीरे-धीरे पहाड़ों के अनुकूल ढालने में मदद करता है।
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