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Varanasi Highway Projects: वाराणसी को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ₹25,500 करोड़ का मेगा प्लान, वरुणा और गंगा के किनारे बनेंगे दो शानदार एलिवेटेड कॉरिडोर!

उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी वाराणसी (Kashi) की सूरत अब पूरी तरह बदलने वाली है। शहर को दशकों पुरानी ट्रैफिक जाम की समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाने और यहां के रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार (15 जुलाई 2026) को वाराणसी के लिए लगभग ₹25,500 करोड़ की कुल निवेश वाली दो बेहद बड़ी हाईवे परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में इन दोनों महत्वाकांक्षी कॉरिडोर के निर्माण पर मुहर लगाई गई। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए इन प्रोजेक्ट्स का पूरा खाका साझा किया।

पहला प्रोजेक्ट: NH-31 और वाराणसी रिंग रोड लिंक (वरुणा नदी के किनारे)

वाराणसी शहर के आंतरिक ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

  • रूट और लंबाई: यह नया लिंक रोड कुल 43.218 किलोमीटर लंबा होगा, जिसे वरुणा नदी के किनारे-किनारे विकसित किया जा रहा है।

  • डिजाइन: यह मुख्य रूप से एक 6/4-लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा, जिसमें मुख्य कैरिजवे के साथ-साथ शानदार फ्लाईओवर्स, लूप्स, रैंप्स और सर्विस रोड्स का जाल बिछाया जाएगा।

  • लागत और मॉडल: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा इसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत तैयार किया जाएगा। इस पर कुल ₹10,998.32 करोड़ की पूंजीगत लागत आएगी।

दूसरा प्रोजेक्ट: NH-19 और वाराणसी रिंग रोड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर (गंगा नदी के किनारे)

यह प्रोजेक्ट वाराणसी को एक नई पहचान देने के साथ-साथ शहर के बाईपास ट्रैफिक को एक स्मूथ कनेक्टिविटी देगा।

  • रूट और लंबाई: यह राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) और वाराणसी रिंग रोड को आपस में जोड़ेगा। यह 46.039 किलोमीटर लंबी एक ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना है, जो पवित्र गंगा नदी के किनारे-किनारे बेहतरीन रिवरबैंक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

  • आकर्षण: इस प्रोजेक्ट के तहत एक 6-लेन एलिवेटेड मुख्य कैरिजवे बनाया जाएगा। साथ ही, इसके मुख्य आकर्षणों में एक भव्य आइकॉनिक केबल-स्टेयड ब्रिज (Cable-Stayed Bridge) और एक एक्स्ट्राडोज्ड फुट-ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज शामिल हैं।

  • लागत: इसे भी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसकी कुल पूंजीगत लागत ₹14,447.64 करोड़ आंकी गई है।

60 मिनट का सफर सिर्फ 20 मिनट में; जानिए काशीवासियों को होने वाले बड़े फायदे

भविष्य की 50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे इन दोनों मेगा प्रोजेक्ट्स से वाराणसी की अर्बन मोबिलिटी (शहरी गतिशीलता) को एक नया आयाम मिलेगा:

  • यात्रा समय में 70% की कमी: इन परियोजनाओं के पूरी तरह चालू होने के बाद इस रूट पर वाहनों का औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर महज 20 मिनट रह जाएगा।

  • शहर को मिलेगी जाम से मुक्ति: बाहरी राज्यों और जिलों से आने वाले भारी वाहन शहर के भीतर घुसे बिना सीधे NH-19 और NH-31 से रिंग रोड के रास्ते बाहर निकल जाएंगे, जिससे शहर के आंतरिक चौराहों पर भीड़भाड़ पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

  • धार्मिक और शैक्षणिक पर्यटन को बढ़ावा: यह एलिवेटेड कॉरिडोर बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों और सांस्कृतिक केंद्रों तक पहुंचने वाले पर्यटकों को एक बेहद सुगम रास्ता देगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के इस नए जाल से स्थानीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और पूरी अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी।