News India Live, Digital Desk : आज सुबह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम में आई एक तकनीकी खराबी के चलते 100 से ज़्यादा उड़ानें लेट हो गईं। इस वजह से सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में हवाई यात्रा पर असर पड़ा।
अचानक ऐसा क्या हुआ कि रुक गईं उड़ानें?
असल में, हवाई जहाजों को रास्ता दिखाने वाला ATC सिस्टम ही सुबह ठीक से काम नहीं कर रहा था। सोचिए, आसमान में ट्रैफिक पुलिस का काम करने वाला सिस्टम ही अगर खराब हो जाए तो क्या होगा? बस वही हुआ। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए उड़ानों को उड़ान भरने की इजाज़त नहीं दी गई। इसका नतीजा यह हुआ कि कई विमान रनवे पर ही खड़े रह गए और यात्री इंतज़ार करते रहे।
एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों ने बताया कि सुबह 5 बजे से ही उड़ानों में देरी शुरू हो गई थी।एयरपोर्ट पर अचानक भीड़ बढ़ गई और बोर्डिंग गेट पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। एयरलाइंस कंपनियां लगातार यात्रियों को धीरज रखने के लिए कह रही थीं, लेकिन घंटों की देरी की वजह से लोगों का परेशान होना स्वाभाविक था।
मैन्युअल तरीके से काम हुआ, इसलिए हुई ज़्यादा देरी
जब ATC का ऑटोमेटिक सिस्टम फेल हो गया, तो एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को मैन्युअल तरीके से फ्लाइट प्लान तैयार करने पड़े।इसमें काफी समय लगता है, जिसकी वजह से एक के बाद एक उड़ानें लेट होती चली गईं। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइंस ने भी अपने यात्रियों को इस बारे में जानकारी दी और अपडेट के लिए संपर्क में रहने की सलाह दी।
हालांकि, अधिकारी लगातार सिस्टम को ठीक करने में जुटे रहे और यात्रियों को आश्वासन दिया गया कि जल्द ही सब कुछ सामान्य हो जाएगा। पर इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हवाई यात्रा में तकनीक पर हमारी निर्भरता कितनी सही है और क्या ऐसी आपात स्थितियों के लिए हमारे पास कोई बेहतर बैकअप प्लान है?
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