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Gender Equality Bollywood : घर और काम का बोझ, महिलाओं की नियति, कोंकणा सेन शर्मा ने बताया संघर्ष, मैं भी इस दौर से गुजरी हूं

News India Live, Digital Desk: Gender Equality Bollywood : बॉलीवुड की सशक्त अभिनेत्री और निर्देशक कोंकणा सेन शर्मा अपनी बेहतरीन एक्टिंग के लिए तो जानी ही जाती हैं, लेकिन वो समाज के अहम मुद्दों पर भी अपनी राय खुलकर रखती हैं. हाल ही में, उन्होंने एक ऐसे विषय पर बात की है, जिससे भारत की हर कामकाजी महिला कहीं न कहीं जूझती है: घर और ऑफिस के बीच तालमेल बिठाने की ‘सामान्यीकृत ड्यूटी’. कोंकणा ने स्वीकार किया कि इस चुनौती से वो खुद भी निपट चुकी हैं, और उनका बयान ‘भारत में महिलाओं के मुद्दों’ को फिर से चर्चा में ले आया है. ‘कामकाजी महिलाओं का संघर्ष’ कोई नई बात नहीं, लेकिन एक अभिनेत्री के मुंह से सुनना इसे और प्रासंगिक बनाता है.महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी का दबाव:समाज में अक्सर यह मान लिया जाता है कि घर-परिवार की पूरी जिम्मेदारी, खासकर बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी महिला की ही होती है, चाहे वह बाहर नौकरी करती हो या नहीं. कोंकणा सेन शर्मा ने इसी ‘सामान्यीकृत ड्यूटी’ पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “घर और काम के बीच संतुलन बनाना हर महिला के लिए एक बड़ी चुनौती होती है. चाहे वो किसी भी पेशे में हो, उस पर घर संभालने और बच्चों की परवरिश करने की अपेक्षा रहती है.” ये ‘महिलाएं और संतुलन’ हमेशा से ही एक बड़ा प्रश्न रहा है.”मैंने भी सामना किया है…” – कोंकणा का निजी अनुभव:अपने खुद के अनुभवों का जिक्र करते हुए कोंकणा सेन शर्मा ने बताया कि उन्होंने भी अपने जीवन में इस दोहरी जिम्मेदारी का सामना किया है. उन्होंने कहा कि करियर के साथ-साथ घर-परिवार और निजी जीवन को भी समय देना पड़ता है, और यह एक कठिन टास्क होता है. एक तरफ अपने प्रोफेशनल लक्ष्यों को पूरा करना और दूसरी तरफ घर-गृहस्थी को संभालना, अक्सर महिलाओं के लिए थकान और तनाव भरा हो जाता है. यह दर्शाता है कि ‘सेलेब्रिटी मॉम की चुनौतियां’ भी आम महिलाओं से अलग नहीं हैं.कोंकणा के इस बयान से उन लाखों महिलाओं को अपनी बात कहने का मौका मिला है, जो इस संघर्ष को हर दिन जीती हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को इस सोच को बदलने की जरूरत है कि घर की जिम्मेदारी केवल महिला की है. पुरुष भी उतने ही जिम्मेदार होते हैं और उन्हें भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. यह एक ‘आधुनिक नारीवाद’ की बात है जो हर वर्ग में समान रूप से लागू होती है. ‘वर्क लाइफ बैलेंस फॉर वीमेन’ पर कोंकणा का बयान बेहद प्रासंगिक है.उनकी बात हमें इस ओर ध्यान दिलाती है कि हम अक्सर महिला की सफलता को तभी सराहते हैं, जब वह घर और बाहर दोनों जगह सब कुछ मैनेज कर ले, जबकि पुरुषों से इतनी अपेक्षा नहीं रखी जाती. यह एक गहरी सामाजिक असमानता है जिस पर विचार करना आवश्यक है. कोंकणा सेन शर्मा ने अपनी इस बेबाक राय से ‘बॉलीवुड और महिला सशक्तिकरण’ के लिए एक मिसाल पेश की है.