
News India Live, Digital Desk: दुनिया की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई रैंकिंग नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक विवाद है। यूनिवर्सिटी के ‘डिविनिटी स्कूल’ (Divinity School) द्वारा संस्कृत के प्रचार के लिए किए गए एक पोस्ट को लेकर हिंदू समुदाय ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद संस्थान को कदम पीछे खींचने पड़े।1. क्या था पूरा विवाद? (The Controversy)विवाद की शुरुआत तब हुई जब हार्वर्ड ने अपने संस्कृत भाषा के नए कोर्स को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की।आपत्तिजनक संदर्भ: हिंदू समुदाय और कई विद्वानों का आरोप था कि पोस्ट में संस्कृत को केवल एक ‘मृत भाषा’ या ‘अकादमिक वस्तु’ की तरह पेश किया गया, जबकि इसके आध्यात्मिक और जीवित सांस्कृतिक महत्व को नजरअंदाज किया गया।समुदाय की प्रतिक्रिया: अमेरिका और भारत के कई हिंदू संगठनों ने इसे ‘सांस्कृतिक असंवेदनशीलता’ (Cultural Insensitivity) करार दिया। उनका तर्क था कि संस्कृत करोड़ों लोगों की आस्था और दैनिक प्रार्थनाओं का हिस्सा है।2. हार्वर्ड ने माफी में क्या कहा?विरोध को बढ़ता देख हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के संबंधित विभाग ने अपनी गलती स्वीकार की।औपचारिक खेद: यूनिवर्सिटी ने कहा, “हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। हम संस्कृत के गहरे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व का सम्मान करते हैं और अनजाने में हुई इस चूक के लिए माफी मांगते हैं।”पोस्ट हटाना: विवादित पोस्ट को अब हटा दिया गया है और उसकी जगह संस्कृत की महत्ता को दर्शाने वाला नया संदर्भ जोड़ा गया है।3. संस्कृत के प्रति हार्वर्ड का झुकावविवादों के बावजूद, हार्वर्ड में संस्कृत और भारतीय दर्शन के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।कोर्स का महत्व: हार्वर्ड का ‘डिपार्टमेंट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज’ दुनिया के उन चुनिंदा केंद्रों में से एक है जहां प्राचीन ग्रंथों पर गहरा शोध होता है।नई पहल: यूनिवर्सिटी अब हिंदू और बौद्ध धर्म के मूल ग्रंथों को आधुनिक छात्रों के लिए सुलभ बनाने के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और इंटरैक्टिव कोर्स शुरू कर रही है।4. विशेषज्ञों की रायशिक्षाविदों का मानना है कि वैश्विक विश्वविद्यालयों को प्राचीन भाषाओं और संस्कृतियों के प्रचार के दौरान अधिक ‘सांस्कृतिक संवेदनशीलता’ बरतने की जरूरत है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि एक दर्शन है जिसे आधुनिक संदर्भों में सही ढंग से पेश करना जरूरी है।
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