Wednesday , September 23 2020

अस्पतालों से रोगियों का निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फिक्की और एम्स, नई दिल्ली के सहयोग से देश में कोविड-19 के उपचार की सुविधा प्रदान करने वाले निजी अस्पतालों के साथ एक वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया। इसके माध्यम से, कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों की दर में कमी लाने के लिए कोविड-19 के प्रबंधन में नैदानिक ​​प्रोटोकॉल और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान किया गया।

वैसे तो कोविड-19 ने देश की स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए अभूतपूर्व चुनौतियां पेश की हैं लेकिन सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र ने भी इसके प्रति अपनी सक्रिय प्रतिक्रियाएं दी हैं। इस संगोष्ठी का आयोजन, देश में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अस्पतालों द्वारा लागू किए जा रहे सर्वोत्तम प्रथाओं और प्रभावी उपचार पद्धतियों को साझा करने के लिए किया गया। मंत्रालय ने अस्पताल के प्रतिनिधियों को उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं में कोविड-19 का प्रबंधन करते समय होने वाली प्रमुख चिंताओं और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इस वर्चुअल संगोष्ठी का उद्घाटन किया। उन्होंने सरकार के इस संकल्प को फिर से दोहराया कि कोविड-19 के रोगियों को बिस्तरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और उनका त्वरित इलाज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा सामूहिक लक्ष्य निश्चित रूप से एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण होना चाहिए है जो सभी के लिए उपलब्ध, सस्ता और सुलभ हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ मिलकर मृत्यु दर को 1% से कम रखने का प्रयास करना है।

सर्वोत्तम प्रथाओं में विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आईसीयू के डॉक्टरों की नैदानिक ​​प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए ई-आईसीयू, उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) और नैदानिक ग्रैंड राउंड के माध्यम से, एम्स, नई दिल्ली द्वारा आयोजित टेली-परामर्श सत्रों पर चर्चा शामिल की गई। यह रोकथाम, बचाव, प्रारंभिक पहचान के लिए विभिन्न केंद्रित रणनीतियों का पूरक है, जिसके परिणामस्वरूप ठीक होने की दर में वृद्धि और मृत्यु दर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।

बैठक के दौरान मृत्यु दर को कम करने के लिए, कोविड-19 रोगियों का समय पर उपचार करने के महत्व पर बल दिया गया। अस्पतालों को संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण करने के लिए सभी नियमों का पालन करते हुए अपने स्वास्थ्य कर्मियों की रक्षा करने और कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। अस्पतालों को रोगियों का निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया। साक्ष्य आधारित उपचार प्रोटोकॉल के महत्व और कोविड-19 रोगियों के उपचार में भेदभाव को समाप्त करने पर भी बल दिया गया।

निजी अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी कोविड-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में अपने अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया। निजी अस्पतालों द्वारा कई सर्वोत्तम प्रथाओं को भी साझा किया गया, जिनमें सुविधा स्तर पर प्रमुख मैट्रिक्स की नियमित निगरानी और श्रेणी-2 और श्रेणी-3 शहरों के अस्पतालों में कर्मचारियों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना शामिल है। छोटी सुविधाओं द्वारा रोगियों को देरी से रेफर करना और स्वास्थ्य बीमा की कमी के कारण वित्तीय तनाव की चिंताओं पर भी चर्चा की गई। इस संगोष्ठी में पूरे देश के 150 से ज्यादा अस्पतालों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ चिकित्सकों और चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।

इस संगोष्ठी मेंप्रो बलराम भार्गव, महानिदेशक, आईसीएमआर, डॉ रणदीप गुलेरिया, निदेशक, एम्स, श्री लव अग्रवाल, संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, डॉ. संगीता रेड्डी, अध्यक्ष, फिक्की और जेएमडी, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज, डॉ. आलोक रॉय, फिक्की हेल्थ सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष और मेडिका ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन भी उपस्थित हुए।

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