
ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस महकमे में उस समय हड़कंप मच गया जब अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रमुख सैन्य ठिकाने पर हमले की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ। ब्रिटिश पुलिस ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा की कि वे इस बात की बहुत ही बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्या रॉयल एयर फोर्स (RAF) के फेयरफोर्ड एयरबेस को निशाना बनाने की इस खतरनाक साजिश के पीछे किसी विदेशी देश या विदेशी ताकतों के लिए काम करने वाले ऑपरेटिव्स का हाथ था। इस बीच, इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार किए गए पांचों संदिग्धों को कड़ी जमानत शर्तों पर रिहा किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह सनसनीखेज मामला रविवार की सुबह उस समय प्रकाश में आया जब लंदन के रहने वाले 20 से 25 वर्ष की आयु के पांच ब्रिटिश नागरिकों को आतंकवाद विरोधी दस्ते ने हिरासत में लिया था। स्थानीय क्षेत्र के एक सतर्क किसान ने पुलिस को सूचना दी थी कि तीन संदिग्ध सफेद रंग की वैन आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। आपको बता दें कि फेयरफोर्ड ब्रिटेन का एक बेहद महत्वपूर्ण सैन्य बेस है, जहां अमेरिकी बमवर्षक (बॉम्बर) विमान तैनात रहते हैं और ईरान के खिलाफ अभियानों व रणनीतिक मिशनों के संचालन में इनका उपयोग किया जाता है।
आतंकवाद-रोधी पुलिस प्रमुख का बयान: 'जांच अभी खत्म नहीं हुई है'
ब्रिटेन की आतंकवाद-रोधी पुलिस के प्रमुख लॉरेंस टेलर ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि जिन पांच संदिग्धों को विस्फोटक से जुड़े गंभीर अपराधों और आतंकवादी हमले की साजिश रचने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था, उन्हें सोमवार को कड़ी कानूनी जमानत शर्तों के तहत रिहा कर दिया जाएगा। हालांकि, पुलिस ने यह भी साफ कर दिया है कि संदिग्धों की जमानत का यह बिल्कुल भी अर्थ यह नहीं है कि इस मामले की जांच समाप्त हो चुकी है।
लंदन पुलिस मुख्यालय के बाहर बोलते हुए लॉरेंस टेलर ने कहा, "साफ तौर पर समझें तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हमारी जांच बंद हो गई है। वे सभी संदिग्ध अभी भी हमारी व्यापक जांच के दायरे में बने हुए हैं, क्योंकि हमारी खुफिया और जांच टीमें इस सनसनीखेज मामले के कई अलग-अलग पहलुओं और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को खंगालने में जुटी हुई हैं।"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के तीखे दावे
इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कहा कि यह पूरी घटना सीधे तौर पर ईरान से जुड़ी हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि यह मामला उनके हाथ में होता, तो वे किसी भी सूरत में ऐसे संदिग्धों को इतनी आसानी से जमानत पर रिहा नहीं करते। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा, "मैं ऐसा बिल्कुल नहीं करता।"
इसी कड़ी में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी फॉक्स न्यूज नेटवर्क के एक कार्यक्रम में दावा किया कि वीकेंड पर ब्रिटेन में जो कुछ भी हुआ, वह बेहद गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है और इसमें स्पष्ट रूप से किसी विदेशी पक्ष या देश की संलिप्तता है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इस दावे के समर्थन में अभी तक कोई ठोस सार्वजनिक सबूत साझा नहीं किया गया है।
ईरान ने नकारे सभी आरोप, कतर कर सकता है मध्यस्थता
दूसरी ओर, लंदन स्थित ईरानी दूतावास ने अमेरिकी और पश्चिमी देशों के इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी दूतावास की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उनकी संलिप्तता के बारे में फैलाई जा रही हालिया अटकलें पूरी तरह बेबुनियाद, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं, जिनकी वे कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। दूतावास का मानना है कि इस तरह के प्रोपेगैंडा का उद्देश्य ब्रिटेन के भीतर 'इरानोफोबिया' (Iranophobia) की भावना को बढ़ावा देना है।
इस बीच, कूटनीतिक हलकों से खबर आ रही है कि खाड़ी देश कतर इस पूरे कूटनीतिक तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। बातचीत की अंदरूनी जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कतर के बिचौलिए न्यूयॉर्क में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और अमेरिकी पक्ष के साथ अलग-अलग दौर की वार्ता करेंगे। माना जा रहा है कि इन बैठकों में ईरान द्वारा हाल ही में पेश किए गए प्रस्ताव के संशोधित स्वरूप पर मुख्य रूप से चर्चा की जाएगी।
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