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शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण न हो उसमें सामाजिकता एवं व्यापकता का भी भाव होना चाहिए: डा0 दिनेश शर्मा

लखनऊ: अध्यापक अनवरत विद्यार्थी होता है, जो अध्ययन करता है वही अध्यापन करता है और जिसमें पढ़कर अनवरत सीखने की प्रवृत्ति होती है वही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक होता है। अध्यापक को नई-नई तकनीकि सीखना चाहिए। यह विचार प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा0 दिनेश शर्मा ने आज यहां इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में माध्यमिक शिक्षा विभाग एवं सी.आई.आई. के संयुक्त तत्वावधान में हुए दो दिवसीय स्कूल समिट के समापन समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह समिट एक ऐसा शैक्षिक मंथन रहा, जिसमें अमृत ही अमृत निकला और यह अनुभव के रूप में सभी को प्राप्त हुआ है। हमने एक दूसरे से बहुत कुछ सीखा है। इस प्रकार की समिट हमें नई-नई तकनीकी ज्ञान को बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है। इसके माध्यम से एक-दूसरे के ज्ञान का आदान-प्रदान होता है और हम अपने विचारों को और परिपक्व बना पाते हैं।

डा0 शर्मा ने कहा कि सभी स्कूलों का एक डेवेलपमेन्ट प्लान बनना चाहिए। शिक्षक का उन्नयन ठीक से हो, कहां सुधार की जरूरत है आदि बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा एक ऐक्शन प्लान तैयार किया गया है। अगर अध्यापक अच्छा है, तो विद्यालय अपने-आप से अच्छा कहलाएगा। शिक्षा में सामाजिक गुणों का समावेश होना चाहिए, शिक्षा नैतिक होनी चाहिए। शिक्षा से बच्चों का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। बच्चे को ऐसी शिक्षा नहीं मिलनी चाहिए कि वह उसके शारीरिक विकास को अवरुद्ध कर दे। उसे सामाजिक सरोकर से दूर नहीं होना चाहिए। हमे एक व्यापक चिंतन के साथ शिक्षा में सुधारों की ओर बढ़ना होगा।

 उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सरल हो, सबके लिए हो, सर्वव्यापी हो, शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण न हो उसमें सामाजिकता एवं व्यापकता का भी भाव होना चाहिए। रोजगार सृजन वाली शिक्षा बनाने पर सबका जोर है। उन्होंने कहा कि बच्चा जब नवीं क्लास में हो तभी उसको रोजगार उन्मुख शिक्षा मिलने लगे और इण्टर तक शिक्षा इस प्रकार हो कि उसे नौकरी की चिंता न रहे। जब बच्चा उच्च शिक्षा प्राप्त करे तो रोजगार के कई अवसर उसके सम्मुख रहें। उन्होंने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि कई विश्वविद्यालयों में प्लेसमेन्ट सेल बने हुए हैं। माध्यमिक शिक्षा में भी प्रयास है कि रोजगार सेल बने। रोजगार परक शिक्षा में नई तकनीकि को अपनाए जाने की प्रवृत्ति होनी चाहिए। आज की आवश्यकता के अनुसार बच्चे की 9वीं क्लास से ही काउसिलिंग होनी चाहिए। इसके लिए भी एक सेल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक पुलिस स्कूल होना चाहिए, कौशल विकास के भी स्कूल होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस युनिवर्सिटी बने इसके लिए निजी क्षेत्र का आहवान किया कि इस प्रकार की चीजों के लिए आगे आएं, जिसमें बच्चा जिस क्षेत्र में आगे जाना चाहता है उसमें उसे पहले से ही तैयार किया जा सके। कालेजों में पूरातन छात्र सम्मेलन अवश्य किए जाएं। पुरातन छात्र सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने मथुरा का उदाहरण दिया, जहां लगभग 146 ऐसे विद्यालय हैं जहां पर पुरातन छात्रों के सहयोग से विद्यालय का सुदृढ़ीकरण किया गया।

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि पूरे प्रदेश में शिक्षा उन्नयन हो, इसके लिए इस दो दिवसीय समिट का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से लोगों को नए विचारों एवं तकनीक को जानने-समझने का मौका मिला है। बेसिक शिक्षा विभाग मा0 मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्य नाथ के निर्देशन में शिक्षा को गुणवत्ता पूर्ण बनाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।

उन्होंने सभी से आहवान किया कि सभी के सहयोग एवं समन्वय से बेसिक शिक्षा को सवारने का प्रदेश सरकार के प्रयास को सफल बनाए। बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री जी के व्यक्तिगत रूचि के कारण उ0प्र0 के परिषदीय स्कूलों पर फोकस किया गया। स्कूल चलो अभियान की शुरूआत कर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में लगभग 50 हजार नामांकन बढ़ाया गया। आउट आफ स्कूल बच्चों को स्कूल से जोड़ा गया। स्कूलों की स्थिति को सुधारने के लिए अवसंचरात्मक सुधार पंचायती राज विभाग के माध्यम से किया गया। जिसका परिणाम रहा कि 1.59 लाख विद्यालयों में से लगभग 91 हजार विद्यालयों को अवसंरचनात्क विकास कर उनका सुदृढ़ीकरण किया गया। बाकी जो बचे हैं उन्हें भी क्रमशः किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्य में कारपोरेट जगत का आह्वान किया कि इसमें वे अपना सहयोग दें। उन्होंने कहा कि कारपोरेट जगत देश की शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमेशा अपना सहयोग प्रदान करता रहा है। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 के विकास के बिना देश का विकास करना संभव नही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का सपना है कि टाटपट्टी उ0प्र0 के स्कूलों के लिए इतिहास बन जाय। वर्तमान सरकार प्रदेश के सभी स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था करना चाहती है और इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी है। इस दिशा में भी कारपोरेट जगत का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 15 हजार स्कूलों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में बदला है और इसके लगभग 4 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास भी प्रारम्भ किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी स्कूलो में स्मार्ट क्लास हो। पाठ्यक्रम की भिन्नता को दूर करने के लिए एनसीईआरटी पैटर्न को बेसिक शिक्षा विभाग अपनाने जा रहा है। इसको पहली कक्षा में लागू करने का प्रयास शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की अपेक्षा के अनुसार मानव सम्पदा पोर्टल को एक्सेप्ट करते हुए पूरे प्रदेश में शिक्षकों एवं छात्रों का विवरण मानव सम्पदा पोर्टल पर लाने के लिए कार्य किया जा रहा है। भविष्य में बेसिक शिक्षा विभाग पूर्णतया पेपर लेश हो जाएगा। सारी एक्टीविटी डिजिटल होंगी। टीचर के सर्विस बुक से लेकर उनकी छुट्टियों सहित सभी चीजें डिजिटालाइज्ड होंगी। मिड-डे-मील में ओपन ग्लोबल टेण्डर की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने समिट में उपस्थित सभी से आह्वान किया कि सभी लोग प्रदेश की शिक्षा, स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिड-डे-मील आदि में अपना सहयोग प्रदान करें।

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