
News India Live, Digital Desk : काशी की धरती पर शिक्षा और अधिकारों की जंग तेज हो गई है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों ने यूजीसी (UGC) के नए समता बिल (Equity Bill) के खिलाफ गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। परिसर में जबरदस्त नारेबाजी के बाद सैकड़ों की संख्या में छात्र जुलूस निकालकर कचहरी की ओर बढ़े, जिससे पूरे रास्ते यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित रही।केंद्र सरकार और यूजीसी की नीतियों से नाराज छात्रों का आरोप है कि यह नया बिल शिक्षा के समान अवसरों के खिलाफ है और इसके जरिए संस्थानों का ‘राजनीतिकरण’ करने का प्रयास किया जा रहा है।विरोध की मुख्य वजह: क्यों भड़के हैं छात्र?छात्रों के गुस्से का केंद्र यूजीसी का वह प्रस्तावित नियम है जिसे ‘समता बिल’ कहा जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि:सामान्य वर्ग के साथ अन्याय: छात्रों का कहना है कि नए प्रावधानों से सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के अवसरों में कटौती होगी।स्वायत्तता पर हमला: छात्रों का आरोप है कि सरकार इस बिल के माध्यम से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और शैक्षणिक स्वतंत्रता को समाप्त करना चाहती है।राजनीतिकरण: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की साजिश रची जा रही है।कचहरी घेराव के लिए निकले छात्र, भारी पुलिस बल तैनातगुरुवार सुबह से ही काशी विद्यापीठ परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा। छात्र गुटों ने एकजुट होकर पहले कैंपस के भीतर विरोध जताया और फिर विशाल जुलूस की शक्ल में कचहरी की ओर कूच किया।नारेबाजी: छात्रों ने “यूजीसी होश में आओ” और “छात्र एकता जिंदाबाद” के नारों से माहौल गरमा दिया।सुरक्षा के कड़े इंतजाम: आंदोलन की उग्रता को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवानों को तैनात किया है। छात्रों को कचहरी पहुंचने से पहले रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई।क्या है यूजीसी का नया रुख?यूजीसी का तर्क है कि यह बिल उच्च शिक्षण संस्थानों में समावेशिता (Inclusivity) और समानता लाने के लिए जरूरी है। हालांकि, छात्रों और कई शिक्षक संघों का मानना है कि इसके पीछे छिपे हुए एजेंडे से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होगी।छात्र नेता का बयान: “हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार इस काले कानून को वापस नहीं लेती। यह हमारी योग्यता और हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”
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