दिल्ली में नाइट कर्फ्यू हटाने की अपील

रात आठ बजे गिरने लगते हैं दुकानों के शटर
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार कम हो रहे कोरोना के मामले को देखते हुए बीच विभिन्न बाजार संघों ने सरकार से अब नाइट कर्फ्यू हटाने की अपील की है, क्योंकि इससे उनके कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
बता दें कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने पिछले हफ्ते एक बैठक में दुकानों को ऑड-ईवन आधार पर खोलने के नियम और वीकेंड कर्फ्यू को हटाने का फैसला किया था। बैठक के दौरान निर्णय किया गया था कि राजधानी में नाइट कर्फ्यू अभी जारी रहेगा। लिहाजा, दिल्ली में अभी दुकानें सुबह 10 बजे से रात आठ बजे तक खुल रही हैं। दिल्ली के व्यापारियों और दुकानदारों का कहना है कि दुकान बंद करने के समय को बढ़ा देना चाहिए। सरोजिनी नगर मिनी मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक रंधावा ने कहा कि सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक के समय ने वास्तव में वैश्विक महामारी और प्रतिबंधों से पहले से प्रभावित बिक्री को और प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऑड-ईवन नियम हटने के बाद भी हमारी कुल बिक्री केवल 40 फीसद है। इसके अलावा, सुबह अधिक लोग नहीं आते। रंधावा ने कहा कि सर्दियों का अधिकतर सामान हमारे पास बिना बिके ही पड़ा है। फुटपाथ पर सामान बेचने वाले रेहड़ीवाले सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनमें से 75 फीसद को पुलिस हटा देती है। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि दुकानें अधिक समय तक खुली रहने दें, जैसे रात नौ बजे या रात 9.30 बजे तक। बाजार संघों ने कहा कि दुकानदार रात आठ बजे से पहले अपनी दुकानें बंद करना शुरू कर देते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर समय सीमा से परे कुछ समय के लिए भी दुकान खुली रहती है तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। लाजपत नगर व्यापारी संघ के महासचिव अश्वनी मारवाह ने कहा कि दुकानों के बंद होने का समय वास्तव में शाम सवा सात बजे है, क्योंकि रात आठ बजे के कर्फ्यू को ध्यान में रखते हुए दुकानदार शटर गिराने लगते हैं। ग्राहक कर्फ्यू शुरू होने से पहले बाजारों से निकलने की जल्दी में होते हैं। इससे हमारी बिक्री प्रभावित हो रही है। हमारी मांग है कि सुबह 10 से रात नौ बजे के बीच दुकानें खोलने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मामले कम हो रहे हैं और सभी दुकानदारों का पूर्ण टीकाकरण भी हो चुका है। मारवाह ने कहा कि हम कोविड-19 संबंधी दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं, क्योंकि हम भी जिम्मेदार नागरिक हैं।