भारत में होता है अपनेपन का अहसास, बागपत में बोले-रिपब्लिक आफ सोमालीलैंड के उपराष्ट्रपति

रिपब्लिक आफ सोमालीलैंड के उपराष्ट्रपति अब्दिरहमान अबियाल्लाह इस्माइल सियालिसी ने कहा कि भारत में अपनेपन का अहसास होता है, इसलिए हम भारत के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कारोबार बढ़ाना चाहते हैं।
गेटवे इंटरनेशनल स्कूल में पहुंचे सोमालीलैंड के उपराष्ट्रपति
अपने वरिष्ठ सलाहकार हुसैन अल ईसाकी तथा डी. जकारिया दाहिर के साथ चार दिवसीय भारत दौरे पर आए इस्माइल सियालिसी सोमवार को गेटवे इंटरनेशनल स्कूल में पहुंचे। स्कूल में बच्चों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। यहां उन्होंने सांस्कृतिक और भारतीय शिक्षण पद्धति का जायजा लिया। बैंडबाजे से उनका स्वागत हुआ। बच्चों को हनुमान चालीसा पढ़ते देख वह भारतीय संस्कृति से अभिभूत हुए।
भारतीयों को सोमालीलैंड में कारोबार करने का न्योता
उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के साथ कारोबार बढ़ाने के मकसद से हम यहां निवेश की संभावना तलाशने आए हैं। सोमालीलैंड में चावल, इलेक्ट्रानिक उपकरण, कापर, एल्युमिनियम तथा सोना समेत अन्य प्राकृतिक संपदा हैं। हमारे देश का सोना 99 प्रतिशत शुद्ध हैं। भारत के लोग सोमालीलैंड में आकर कारोबार करें। उन्हें हम सुरक्षा और सुविधा देंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बताया अच्छा नेता
सोमालीलैंड के उपराष्ट्रपति अब्दिरहमान अबियाल्लाह इस्माइल सियालिसी ने कहा कि सोमालीलैंड के साथ भारत का वार्षिक व्यापार 442 मिलियन डालर है। हमारी मंशा कृषि आयात-निर्यात और बढ़ाने की है। उन्होंने कहा, हमारे व भारत के बीच भाई-बहन जैसा रिश्ता है। साल 1960 में सोमालीलैंड में भारत का रुपया चलता था। उपराष्ट्रपति ने कहा, भारत में खुलकर बोलने और विचार रखने की आजादी है। उन्होंने नरेन्द्र मोदी को अच्छा नेता बताया। सोमालिया के समुद्री डाकुओं पर पूछे गए सवाल पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि वो अपनी देश की सीमा में ही घटना करते हैं। सोमालीलैंड में ऐसी घटनाएं नहीं होतीं।
भारत ने दिए महान वैज्ञानिक
स्कूल में शिक्षण पद्धति देखने पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहां शिक्षा इतनी उत्तम पद्धति से बच्चों को दी जाती हो वहां के बच्चे प्रत्येक क्षेत्र में अपना परचम लहराते हैं। भारत ने अनेक महान नेता वैज्ञानिक तथा कलाकार दिए हैं।
चीनी मिल देखने की इच्छा नहीं हुई पूरी
सोमालीलैंड के उपराष्ट्रपति ने गेटवे स्कूल कालेज के प्रबंधक कृष्णपाल सिंह से चीनी मिल देखने की इच्छा जताई लेकिन समय कम होने के कारण मिल देखने नहीं जा पाए। कहा कि यहां गन्ना काफी होता है। रास्ते में गन्ना गन्ना दिखाई दिया। कालेज प्रबंधन ने उन्हें बागपत के इतिहास की भी जानकारी दी।