48वीं व्याख्यानमाला गांधी शांति प्रतिष्ठान में हुई आयोजित

दिल्ली: महात्मा गांधी का जादू देश में जिस तरह और जिस स्तर पर फैला, आज उसकी कल्पना करना भी कठिन है क्योंकि हम उल्टी दिशा में बहुत दूर निकल आए हैं। लेकिन हाथ और दिमाग को जोडऩे वाली शिक्षा की संकल्पना हमें आज भी बताती है कि भारतीय शिक्षा की दिशा क्या होनी चाहिए। शिक्षा के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहा है कि उसमें शिक्षा जैसा कोई तत्व बचा ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि आप मुझसे पूछिएगा कि शिक्षा का मतलब क्या है तो मैं सीधे शब्दों में कहूंगा कि मनुष्य की सर्वोत्तम प्रतिभा को जो निखार कर सामने ला सके, उसे शिक्षा कहते हैं। यह बात बुधवार को गांधी शांति प्रतिष्ठान की 48वीं वार्षिक व्याख्यानमाला में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. दिनेश सिंह ने कही। प्रो. सिंह ने कहा कि गांधी जी की शिक्षा की पूरी परिकल्पना गतिशील परिकल्पना है जिसमें शरीर और मन का सर्वश्रेष्ठ रचनात्मक मेल होता है।