लोक कलाओं एवं संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन कर ‘‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’’ की परिकल्पना को किया जायेगा साकार- जयवीर सिंह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह की उपस्थिति में आज पर्यटन निदेशालय में लोक एवं जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान (संस्कृति विभाग) उ0प्र0 तथा लखनऊ विश्वविद्यालय तथा इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नई दिल्ली के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह तीनों संस्थाएं अपने अनुभव, दक्षता का बेहतर इस्तेमाल करते हुए सांस्कृतिक विरासत एवं लोक कलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। इससे प्रधानमंत्री जी का एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपने को धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी।
श्री जयवीर सिंह ने कहा कि देश व प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत एवं लोक कलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सबकी है। इसलिए अपने-अपने क्षेत्र में कार्य करते हुए मूल विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल मार्गदर्शन में भारतीय प्रतीकों, सांस्कृतिक अस्मिता तथा धरोहरों को संरक्षित एवं संवर्धित किया जा रहा है। सभी संस्थाएं एक धारा में मिलकर अपने उद्देश्य में सफल हों ऐसा प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोक एवं जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान लोक कलाओं के संरक्षण तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जमीन पर उतारने के लिए प्रयासरत है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि संस्कृति विभाग नये जोश के साथ अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर लोककलाओं तथा संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। हमारा उद्देश्य लोक कलाओं को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने का है। इससे विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी लोक कलाओं को नया जीवन प्राप्त होगा और नई पीढ़ी इनके बारे में जान सकेगी। उन्होंने कहा कि जनजाति कला संस्थान पूर्व में 10 संस्थानों के साथ एमओयू हस्ताक्षर कर चुका है। आज 11वॉ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर सम्पन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत के तहत सिक्किम राज्य के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होना प्रस्तावित है।
प्रमुख सचिव ने यह भी कहा कि लोक कलाओं एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए श्री राज्यपाल के निर्देशों के अनुसार स्थाना दिवस मनाया जा रहा है। इसके दौरान दूसरे राज्यों के कलाकार अपनी कलाओं का प्रदर्शन करते हैं, जिसके माध्यम से सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय को इन्हीं गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक क्लब स्थापना के लिए 20 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई है। इसके अलावा लोक कलाओं का अभिलेखीकरण करया जा रहा है, जिससे भावी छात्र अपने-अपने संस्थान की प्रतिभा एवं योगदान को जान सकें। उन्होंने कहा कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रॉमा के साथ भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
लोक एवं जनजाति कला एवं संस्कृति संस्थान के निदेशक श्री अतुल द्विवेदी ने आज सम्पन्न हुए समझौता ज्ञापन के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके अलावा लखनऊ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री संजय मेधावी तथा इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली के विभागाध्यक्ष श्री के0 अनिल कुमार ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर पर्यटन सलाहकार श्री जे0पी0 सिंह, भारतेन्दु नाटक अकादमी के निदेशक श्री दिनेश खन्ना के अलावा सहायक निदेशक संस्कृति री तुहिन द्विवेदी एवं अन्य अधिकारी/कर्मचारी मौजूद थे।