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इस्लामाबाद में महामंथन! पाकिस्तान की बुलाई SCO बैठक में शामिल हुआ भारत, चीन और रूस ने भी दी दस्तक

एशियाई क्षेत्र की भू-राजनीति और कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। धुर विरोधी पड़ोसी देश पाकिस्तान की मेजबानी में राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित हो रही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की महत्वपूर्ण बैठक में भारत ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है। आतंकवाद, कश्मीर और सीमा पार तनाव जैसे गंभीर मुद्दों के कारण दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध के बीच भारतीय प्रतिनिधिमंडल का इस्लामाबाद पहुंचना अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में भारत के अलावा रूस, चीन और अन्य मध्य एशियाई सदस्य देशों के शीर्ष राजनयिक और प्रतिनिधि भी हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक कॉरिडोर पर टिकीं पूरी दुनिया की नजरें

पाकिस्तान द्वारा आयोजित की गई इस एससीओ बैठक का मुख्य एजेंडा सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार करना और यूरेशियन क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटना है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक के पहले दौर में व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और आतंकवाद के खिलाफ एक साझा रणनीति बनाने पर गहन चर्चा हुई है। भारत ने हमेशा की तरह इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात को पुरजोर तरीके से उठाया है, जिसे चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और सीपीईसी (CPEC) के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

क्या भारत और पाकिस्तान के बीच बर्फ पिघलने की है यह शुरुआत?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि इस बहुपक्षीय मंच पर भारत और पाकिस्तान का एक साथ बैठना दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने का एक जरिया बन सकता है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि यह एक बहुपक्षीय क्षेत्रीय बैठक है और इसमें हिस्सा लेना किसी भी तरह से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता की बहाली का संकेत नहीं है। इसके बावजूद, इस्लामाबाद, दिल्ली, बीजिंग और मॉस्को के कूटनीतिक हलकों में इस बैठक की इन-कैमरा चर्चाओं और नेताओं की अनौपचारिक मुलाकातों (पुल-असाइड मीटिंग्स) को लेकर अटकलों का बाजार काफी गर्म है।

यूरेशिया और दक्षिण एशिया के समीकरणों पर पड़ेगा सीधा असर

इस समय जब दुनिया रूस-यूक्रेन संकट और मध्य-पूर्व के तनाव से जूझ रही है, ऐसे में यूरेशिया और दक्षिण एशिया के देशों का यह साझा मंच वैश्विक शक्ति संतुलन के लिहाज से बेहद खास हो जाता है। बैठक में रूस और चीन की जुगलबंदी के बीच भारत ने अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति का प्रदर्शन किया है। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई समेत पूरे देश के रणनीतिक थिंक-टैंक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि इस बैठक के खत्म होने के बाद जो संयुक्त घोषणापत्र जारी होगा, उसमें आतंकवाद और क्षेत्रीय व्यापार को लेकर क्या नई गाइडलाइंस सामने आती हैं।