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‘कमाई अपनी लगती ही नहीं!’ 1 साल में भरा ₹1.14 करोड़ का इनकम टैक्स, फिर शख्स ने बयां किया ऐसा दर्द कि वायरल हो गई पोस्ट

नई दिल्ली: भारत में हर साल टैक्स फाइलिंग सीजन के आसपास नौकरीपेशा और बिजनेसमैन वर्ग के बीच टैक्स की दरों और उसके बदले मिलने वाली सुविधाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो जाती हैं। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक फाउंडर और आंत्रप्रेन्योर (Entrepreneur) की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने वित्त वर्ष के दौरान अपने द्वारा भरे गए भारी-भरकम टैक्स का ब्योरा साझा किया है। शख्स ने खुलासा किया कि उसने केवल एक वित्तीय वर्ष में ₹1,14,00,000 (1.14 करोड़ रुपये) का इनकम टैक्स चुकाया है।

हालांकि, टैक्स भरने के बाद उन्होंने जिस दर्द और निराशा को बयां किया, उसने देश भर के मध्यम और उच्च-आय वर्ग के टैक्सपेयर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शख्स का कहना है कि इतना बड़ा टैक्स चुकाने के बाद भी उन्हें कभी यह अहसास नहीं होता कि उनकी कमाई उनकी अपनी है।

आखिर आंत्रप्रेन्योर ने ऐसा क्यों कहा?

वायरल पोस्ट में बिजनेसमैन ने भारत के मौजूदा टैक्स ढांचे और टैक्स देने के बाद मिलने वाले रिटर्न्स (सरकारी सुविधाओं) पर अपनी हताशा व्यक्त की। उनके मुताबिक:

  1. कम कमाई का अहसास: कुल कमाई का लगभग 30% से 39% (सरचार्ज और सेस मिलाकर) हिस्सा सीधे डायरेक्ट टैक्स (Income Tax) के रूप में सरकार के पास चला जाता है।

  2. इनडायरेक्ट टैक्स का दोहरा बोझ: टैक्स चुकाने के बाद बची हुई रकम से जब वे कोई कार, प्रॉपर्टी या रोजाना के सामान खरीदते हैं, तो उस पर अलग से 18% से 28% तक जीएसटी (GST) और अन्य लोकल टैक्स चुकाने पड़ते हैं।

  3. सुविधाओं का अभाव: शख्स का दर्द यह था कि करोड़ों रुपये का योगदान देने के बावजूद उन्हें और उनके परिवार को सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा या इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में यूरोपीय देशों या विकसित राष्ट्रों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। उन्हें प्राइवेट अस्पतालों, प्राइवेट स्कूलों और टोल रोड्स के लिए अलग से भारी खर्च करना पड़ता है।

"जब आप अपनी मेहनत की कमाई का लगभग आधा हिस्सा टैक्स में दे देते हैं और बदले में आपको हर बुनियादी सुविधा के लिए जेब ढीली करनी पड़ती है, तो लगता ही नहीं कि आप अपने लिए कमा रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे आप सरकार के अनऑफिशियल पार्टनर हैं, जहाँ मुनाफा सरकार का और सारा रिस्क आपका है।"टैक्सपेयर की वायरल पोस्ट

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया: दो धड़ों में बटा इंटरनेट

इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर यूज़र्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:

  • टैक्सपेयर्स का समर्थन: अधिकांश नौकरीपेशा और बिजनेसमैन यूज़र्स ने इस बात से सहमति जताई। लोगों का कहना है कि भारत में ईमानदारी से टैक्स भरने वाले 'अति-अल्पसंख्यक' (Top 1%) वर्ग को कोई विशेष सामाजिक सुरक्षा (Social Security) या रिटायर्मेंट बेनिफिट्स नहीं मिलते।

  • दूसरा पक्ष: वहीं, कुछ यूज़र्स का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास (जैसे हाइवे, रेलवे और रक्षा बजट) के लिए टैक्स कलेक्शन बेहद जरूरी है।

भारत में डायरेक्ट टैक्स का ढांचा

फिलहाल भारत में पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत उच्चतम इनकम स्लैब पर 30% का बेसिक टैक्स लगता है। इसके ऊपर 50 लाख से अधिक की आय पर सरचार्ज (Surcharge) और 4% का हेल्थ एवं एजुकेशन सेस (Cess) जोड़ा जाता है, जिससे उच्च आय वाले व्यक्तियों का कुल टैक्स मार्जिन काफी बढ़ जाता है।