
नई दिल्ली/गुरुग्राम: भारत के अफोर्डेबल और मिड-सैकेंडरी हाउसिंग सेगमेंट में तेजी से उभर रहे फिनटेक प्लेटफॉर्म BASIC Home Loan ने अपने लंबी अवधि के विस्तार (Expansion) की घोषणा की है। कंपनी ने साल 2029 तक देशभर में 500 नए फिजिकल 'फिनफिड' (FinFeed) / फाइनेंस सेंटर खोलने की रणनीति बनाई है।
इस आक्रामक नेटवर्क विस्तार के साथ, फिनटेक कंपनी ने हर साल ₹60,000 करोड़ मूल्य के होम लोन वितरित (Disburse) करने का महत्वाकांक्षी वार्षिक लक्ष्य तय किया है। कंपनी का मुख्य फोकस भारत के छोटे शहरों (Tier-2, Tier-3 और Tier-4) के निम्न और मध्यम आय वर्ग (LMI) के परिवारों को आसान और डिजिटल माध्यम से होम लोन उपलब्ध कराना है।
क्या है बेसिक होम लोन का 'फिजिअल' (Phygital) मॉडल?
बेसिक होम लोन टेक्नोलॉजी और मानवीय सहायता (Phygital – Physical + Digital) के अनूठे मेल पर काम करता है:
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लास्ट-माइल डिलीवरी: ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहां बड़े बैंकों की सीधी पहुंच कम है, वहां ये 500 नए सेंटर्स 'वन-स्टॉप सोल्यूशन' का काम करेंगे।
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स्थानीय एजेंट नेटवर्क: इन सेंटर्स के जरिए स्थानीय वित्तीय सलाहकारों (Basic Agents) को जोड़ा जाएगा, जो ग्राहकों को लोन आवेदन से लेकर फाइल प्रोसेस कराने और डॉक्यूमेंटेशन में मदद करेंगे।
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तेज अप्रूवल प्रक्रिया: फिनटेक की डिजिटल एल्गोरिदम और बैकएंड ऑटोमेशन के जरिए लोन अप्रूवल की प्रक्रिया को तेज बनाया गया है।
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन और भावी विजन
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लोन वितरण का लक्ष्य: कंपनी का उद्देश्य 2029 तक अपने वार्षिक एयूएम (AUM) और लोन प्रोसेसिंग क्षमता को ₹60,000 करोड़ प्रति वर्ष तक पहुँचाना है।
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अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा: भारत सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और 'सबके लिए आवास' विजन के अनुरूप, कंपनी मुख्य रूप से पहली बार घर खरीदने वाले (First-time Homebuyers) और अनऑर्गनाइज्ड/सेल्फ-एम्प्लॉयड (Self-Employed) वर्ग को लोन देने पर जोर दे रही है।
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बैंकों और एचएफसी के साथ साझेदारी: बेसिक होम लोन देश के 50 से अधिक प्रमुख बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) के साथ मिलकर काम करता है, जिससे ग्राहकों को सबसे सस्ती ब्याज दरें चुनने का विकल्प मिलता है।
हाउसिंग फाइनेंस मार्केट में क्यों बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा?
भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में छोटे शहरों से होम लोन की मांग में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है। फिनटेक कंपनियों द्वारा अपने फिजिकल नेटवर्क (फाइनेंस सेंटर) को बढ़ाने से बड़े निजी व सरकारी बैंकों के सामने भी छोटे कस्बों में अपनी पहुंच सुधारने की चुनौती होगी। इससे अंततः आम नागरिकों को सस्ती ब्याज दरों और आसान लोन प्रक्रिया का सीधा फायदा मिलेगा।
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