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जेब में फटने और पानी में भीगने की झंझट खत्म: जानिए आपकी जेब में कब से आने वाले हैं ₹10 और ₹20 के नए प्लास्टिक नोट

वर्ष 2016 की नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 रुपये के पुराने कागजी नोट बंद कर 500 और 2000 रुपये के नए नोट जारी किए गए थे। अब भारतीय मुद्रा बाजार में एक और बड़ा ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही कागज के पारंपरिक नोटों की जगह टिकाऊ और मजबूत 'पॉलीमर' यानी प्लास्टिक के बैंक नोट लॉन्च करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद रिजर्व बैंक ने 200 करोड़ नए प्लास्टिक नोटों की छपाई का खाका तैयार कर लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले कुछ समय में आपकी जेब में फटने और भीगने से बेअसर रहने वाले प्लास्टिक के नोट नजर आने लगेंगे।

दुनिया के 60 देशों की लिस्ट में शामिल होगा भारत, जानिए कब बना था प्लान

इस कदम के साथ ही भारत अब ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम (UK) जैसे दुनिया के उन 60 से अधिक देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां प्लास्टिक करेंसी पहले से सफलता के साथ चलन में है। संसद में खुद वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने केंद्र सरकार द्वारा आरबीआई को प्लास्टिक नोट छापने की हरी झंडी दिए जाने की आधिकारिक जानकारी दी। हालांकि, भारत में पहली बार प्लास्टिक नोट लाने की बात नहीं हो रही है। इससे पहले साल 2012 में भी करेंसी की लाइफ बढ़ाने के उद्देश्य से पॉलीमर नोटों को बाजार में उतारने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

शुरुआत में जारी होंगे ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ नोट, जानिए कानूनी नियम

रिजर्व बैंक सबसे पहले इस नई व्यवस्था का फील्ड ट्रायल करेगा। इस ट्रायल में सफलता मिलने के बाद सबसे पहले 10 रुपये और 20 रुपये मूल्यवर्ग के नए नोट छापे जाएंगे। योजना के तहत 10 रुपये के 100 करोड़ और 20 रुपये के 100 करोड़ यानी कुल 200 करोड़ प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे। कानूनी ढांचे की बात करें तो आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम, 1934 की धारा 25' के तहत इन नए पॉलीमर नोटों की डिजाइन और मटीरियल का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा है।

पानी, धूल और गंदगी से रहेंगे बेअसर: जानिए प्लास्टिक नोटों के 5 बड़े फायदे

आरबीआई कपास वाले कागज के बजाय 'पॉलीमर सबस्ट्रेट' शीट पर इन नोटों की छपाई करेगा। ये नोट दिखने और छूने में काफी हद तक कागजी नोटों जैसे ही महसूस होंगे, लेकिन इनकी मजबूती कई गुना ज्यादा होगी:

  • खराब नहीं होंगे: प्लास्टिक नोट पानी, पसीने, धूल और गंदगी से खराब नहीं होंगे और हाथ से खींचने पर भी आसानी से फटेंगे नहीं।

  • हल्के और फोल्डेबल: कागजी नोटों की ही तरह इन्हें भी आसानी से मोड़ा और जेब या पर्स में रखा जा सकेगा।

  • समान अनुभव: छूने और इस्तेमाल करने में यह सामान्य कागजी नोटों जितने ही सहज और हल्के महसूस होंगे।

  • नकली नोटों पर लगेगी लगाम: पॉलीमर शीट्स की परतों के बीच एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जाएंगे, जिनकी नकल कर पाना जालसाजों के लिए लगभग असंभव होगा। इससे नकली करेंसी की समस्या से मुक्ति मिलेगी।

  • सरकारी खजाने की बचत: कागजी नोटों के जल्द गलने-फटने के कारण सरकार को हर साल छपाई पर भारी बजट खर्च करना पड़ता है। वित्त वर्ष 2024-25 में ही आरबीआई ने कागजी नोटों की छपाई पर करीब ₹6,372 करोड़ खर्च किए थे। प्लास्टिक नोट की लंबी उम्र से इस री-प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च में भारी कटौती होगी।

कैसे होता है नोट छापने का फैसला और कहां-कहां हैं भारत की 4 प्रिंटिंग प्रेस?

देश की अर्थव्यवस्था में नकदी की जरूरत, नोटों के आकार, रंग और सुरक्षा मानकों का निर्धारण आरबीआई ही करता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की धारा 22 के तहत आरबीआई को नोट छापने का विशेष अधिकार प्राप्त है। धारा 25 के तहत नोट के डिजाइन, मटीरियल और रंग को सरकार से मंजूरी मिलती है, वहीं धारा 26(2) का इस्तेमाल कर किसी भी पुराने नोट का लीगल टेंडर दर्जा खत्म किया जाता है।

वर्तमान में भारत में नोटों की छपाई के लिए कुल 4 प्रिंटिंग प्रेस काम करती हैं:

  1. मैसूर (कर्नाटक) – आरबीआई की सहायक संस्था

  2. सालबोनी (पश्चिम बंगाल) – आरबीआई की सहायक संस्था

  3. नासिक (महाराष्ट्र) – केंद्र सरकार के अधीन

  4. देवास (मध्य प्रदेश) – केंद्र सरकार के अधीन

क्या बंद हो जाएंगे पुराने ₹10 और ₹20 के कागजी नोट?

प्लास्टिक नोट आने की खबर के बाद कई लोगों के मन में यह आशंका है कि क्या पुराने कागजी नोट बंद कर दिए जाएंगे। इसका जवाब पूरी तरह 'नहीं' है। रिजर्व बैंक प्लास्टिक नोटों को केवल एक पायलट प्रोजेक्ट या ट्रायल के रूप में ला रहा है। नए प्लास्टिक नोट आने के बाद भी पुराने कागजी नोट पहले की तरह ही पूरी तरह वैध (Legal Tender) रहेंगे। बाजार में पॉलीमर और पेपर दोनों ही तरह के नोट एक साथ (Co-existence) चलते रहेंगे। जब तक प्लास्टिक नोट पूरी तरह से अर्थव्यवस्था में स्थापित नहीं हो जाते, तब तक कागजी नोटों का सर्कुलेशन जारी रहेगा।

कब तक आएंगे बाजार में और क्या एटीएम में करना होगा बदलाव?

आरबीआई ने पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की आपूर्ति के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं, जिसकी अंतिम तारीख 18 अगस्त 2026 तय की गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद छपाई शुरू होगी और चरणबद्ध तरीके से इन्हें बाजार में उतारा जाएगा। फिलहाल सरकार या आरबीआई ने इनके आधिकारिक लॉन्चिंग की तारीख तय नहीं की है।

रही बात एटीएम (ATM) और नोट गिनने वाली मशीनों की, तो फिलहाल ₹10 और ₹20 के छोटे नोटों के साथ ट्रायल हो रहा है, जो अमूमन एटीएम में नहीं रखे जाते। इसलिए अभी तुरंत एटीएम मशीनों में किसी तकनीकी बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, अगर भविष्य में यह प्रयोग सफल रहता है और ₹100, ₹200 या ₹500 के बड़े नोटों को भी प्लास्टिक में ढाला जाता है, तो बैंकों को अपनी एटीएम मशीनों को नए नोटों के आकार और वजन के हिसाब से रिकैलिब्रेट करना होगा।

क्या प्लास्टिक नोट छापना खर्चीला है?

जी हां, शुरुआत में प्लास्टिक नोटों की छपाई की प्राथमिक लागत पारंपरिक कागजी नोटों के मुकाबले थोड़ी अधिक आती है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली पॉलीमर सामग्री और प्रिंटिंग तकनीक बेहद उन्नत होती है। हालांकि, कागजी नोटों के मुकाबले प्लास्टिक नोटों की लाइफ काफी लंबी होने के कारण इन्हें बार-बार छापने और डिस्ट्रीब्यूट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे दीर्घकालिक आधार पर रिजर्व बैंक का हजारों करोड़ रुपया बचेगा।