
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कनाडा और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए नए व्यापारिक और राजनीतिक समझौतों या गठजोड़ को सीधे तौर पर 'दुश्मनी भरा' करार दिया है। ट्रंप अपनी जानी-पहचानी 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) की नीतियों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं, और जब भी उन्हें ऐसा लगता है कि कोई दूसरा देश या देशों का समूह अमेरिका के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, तो वह बिना किसी लाग-लपेट के कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटते। हाल ही में कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच हुए कुछ राजनीतिक और आर्थिक तालमेल को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का यह तीखा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने साफ कर दिया है कि वह इस तरह के गठबंधनों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही कई तरह के भू-राजनीतिक तनावों और मंदी के दौर से गुजर रही है, ऐसे में अमेरिका का इस तरह खुलकर सामने आना दुनिया भर के तमाम देशों के लिए एक बड़ी चेतावनी साबित हो रहा है।
भारी-भरकम टैरिफ लगाने की खुली धमकी: अमेरिकी राष्ट्रपति के निशाने पर आए आयात शुल्क
अपने आक्रामक बयानों और ट्रेड वॉर (Trade War) छेड़ने के लिए मशहूर डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और यूरोपीय संघ को खुली धमकी देते हुए कहा है कि यदि उनके बीच का यह कथित दुश्मनी भरा रवैया और सांठगांठ बंद नहीं हुई, तो अमेरिका उनकी हरकतों का जवाब भारी-भरकम आयात शुल्क यानी टैरिफ (Tariffs) लगाकर देगा। ट्रंप का साफ कहना है कि अमेरिका के बाजारों का अनुचित लाभ उठाने की अनुमति किसी भी देश या क्षेत्रीय संगठन को नहीं दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेताया है कि वे कनाडा से आने वाले उत्पादों और यूरोपीय संघ के देशों से आयात होने वाले सामानों पर भारी टैक्स या पेनल्टी शुल्क लगा सकते हैं, जिससे उन देशों की अर्थव्यवस्था को सीधा तगड़ा झटका लगेगा। इस तरह की टैरिफ नीति का सीधा असर कनाडा के ऑटोमोबाइल, डेयरी, और मेटल सेक्टर के साथ-साथ यूरोपीय संघ की दिग्गज कंपनियों जैसे कि ऑटोमोबाइल और मशीनरी निर्माताओं पर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप की यह धमकी सिर्फ जुबानी जंग नहीं है, बल्कि उनके पिछले कार्यकाल के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए यह पूरी आशंका है कि वे सत्ता में रहते हुए इन आर्थिक हथियारों का खुलकर इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार का पूरा गणित बिगड़ सकता है।
अमेरिका फर्स्ट की नीति और वैश्विक व्यापारिक समीकरणों पर मंडराता बड़ा संकट
डोनाल्ड ट्रंप की यह ताजा चेतावनी एक बार फिर इस बात की गवाही देती है कि वे अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति पर पूरी दृढ़ता से टिके हुए हैं और उनके लिए अमेरिकी घरेलू उद्योग और नौकरियां सबसे पहले आती हैं। ट्रंप का मानना है कि कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले ऐसे समझौते अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों के साथ अन्याय हैं और इससे वैश्विक व्यापार में अमेरिका का दबदबाकमजोर होता है। इस खुली धमकी के बाद से वाशिंगटन से लेकर ओटावा और ब्रसेल्स तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यूरोपीय संघ और कनाडा के शीर्ष नेता इस बात पर माथापच्ची कर रहे हैं कि यदि ट्रंप वास्तव में आयात शुल्क बढ़ाते हैं, तो उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर इसका क्या और कितना बुरा असर पड़ेगा। वैश्वीकरण के इस दौर में जहां सभी देश एक-दूसरे के साथ मिलकर व्यापार करने की वकालत करते हैं, वहीं ट्रंप का यह संरक्षणवादी (Protectionist) रुख दुनिया को एक बार फिर से अलग-अलग व्यापारिक गुटों में बांटने का काम कर रहा है। निवेशकों और शेयर बाजारों में भी इस बात को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है कि यदि अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच सचमुच कोई ट्रेड वॉर छिड़ जाता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो सकती है।
कनाडा और यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया: कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ने के पूरे आसार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा और यूरोपीय संघ के गठबंधन को दुश्मनी भरा बताने और भारी टैरिफ थोपने की धमकी दिए जाने के बाद संबंधित देशों की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री और यूरोपीय संघ के प्रमुख अधिकारियों ने इसे अनुचित और आपसी सहयोग के खिलाफ बताया है, हालांकि कूटनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भारी तनाव साफ महसूस किया जा रहा है। कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था के एक बहुत बड़े हिस्से के लिए अमेरिकी बाजार पर निर्भर है, क्योंकि उसके कुल निर्यात का अधिकांश हिस्सा अमेरिका को ही जाता है। ऐसे में यदि ट्रंप प्रशासन ने वाकई भारी टैरिफ लगा दिए, तो कनाडाई उद्योगों के लिए भारी संकट पैदा हो सकता है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ भी चुप बैठने के मूड में नहीं है और वह भी जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Tariffs) के विकल्पों पर विचार कर रहा है। यदि अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच यह व्यापारिक तनाव और अधिक बढ़ता है, तो पश्चिमी देशों के आपसी रिश्ते काफी हद तक प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की राजनीति और कूटनीति पर पड़ना तय है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने?
डोनाल्ड ट्रंप की इस ताज़ा धमकी का असर केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका सीधा और गहरा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों, करेंसी मार्केट और कमोडिटी ट्रेडिंग पर भी पड़ रहा है। निवेशकों के मन में यह डर बैठ गया है कि यदि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते बिगड़ते हैं, तो वैश्विक विकास दर (Global GDP Growth) को तगड़ा झटका लग सकता है। मंहगाई बढ़ने का खतरा भी मंडराने लगा है क्योंकि जब सामानों पर भारी टैरिफ लगते हैं, तो अंततः उपभोक्ताओं को ही चीजों के ज्यादा दाम चुकाने पड़ते हैं। विश्लेषकों का सुझाव है कि मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल को देखते हुए वैश्विक निवेशकों और कारोबारियों को अपनी रणनीतियों में बदलाव करने की जरूरत है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप अपनी इस धमकी को अमली जामा पहनाते हुए सचमुच कड़े टैरिफ लागू करते हैं या फिर कूटनीतिक बैठकों के जरिए इस विवाद को किसी समझौते के साथ सुलझाया जाता है, लेकिन फिलहाल इस तल्खी ने वैश्विक पटल पर हलचल जरूर मचा दी है।
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