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काश, वो 2 गेंदें और मिल जातीं, इतिहास रचने से चूके राजस्थान के गेंदबाज़ आकाश चौधरी का छलका दर्द

News India Live, Digital Desk: राजस्थान और विदर्भ के बीच खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी मैच में एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसे देखकर हर किसी को युवराज सिंह के 6 छक्कों की याद आ गई। राजस्थान के तेज़ गेंदबाज़ आकाश चौधरी ने बल्ले से ऐसा तूफ़ान मचाया कि रिकॉर्ड बुक्स में एक नया अध्याय जुड़ते-जुड़ते रह गया। आकाश ने सिर्फ़ 10 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया, लेकिन इस ऐतिहासिक पारी के बाद भी उनके मन में एक अफ़सोस रह गया।24 साल के इस खिलाड़ी ने विदर्भ के स्पिनर आदित्य सरवटे के एक ही ओवर में 4 छक्के और 2 चौके जड़कर सनसनी फैला दी। उन्होंने सिर्फ 13 गेंदों पर 5 छक्के और 5 चौकों की मदद से 55 रनों की नाबाद पारी खेली। उनकी इस पारी ने राजस्थान को पहली पारी में एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचाया।इतिहास रचने से चूके आकाशआकाश ने जब 10वीं गेंद पर अपना अर्धशतक पूरा किया, तो वह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे तेज़ अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज़ बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड बंदीप सिंह (15 गेंद) और ऋषभ पंत (24 गेंद) के नाम था। हालांकि, वह लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज़ अर्धशतक के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी करने से सिर्फ़ एक गेंद से चूक गए। यह रिकॉर्ड नेपाल के दीपेंद्र सिंह ऐरी (9 गेंद) के नाम है।मन में रह गया 12 छक्के मारने का सपनाइस शानदार पारी के बाद आकाश चौधरी ने बताया कि उनके मन में कुछ और ही करने का इरादा था। उन्होंने कहा, “जब मैं बल्लेबाज़ी के लिए गया, तो मेरे मन में बस एक ही बात थी कि जितनी हो सके बाउंड्री मारूँ। मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं था।”उन्होंने आगे अपने दिल की बात बताते हुए कहा, “मैंने इससे पहले भी एक ओवर में चार छक्के मारे हैं। आज जब मैंने चार छक्के मार दिए थे, तो मुझे लगा कि मेरे पास 12 छक्के मारने का एक मौक़ा है, जैसा कि मैंने पहले कभी नहीं किया है। मेरा सपना था कि मैं 12 गेंदों पर 12 छक्के मारूँ।”क्यों नहीं पूरा हो पाया सपना?आकाश ने बताया कि वह आख़िरी दो गेंदों पर भी छक्का मारना चाहते थे, लेकिन सामने वाले बल्लेबाज़ अनिकेत चौधरी ने उन्हें समझाया। आकाश ने कहा, “मैंने अनिकेत से पूछा कि क्या मैं जाऊँ और बड़ा शॉट खेलूँ? तो उन्होंने कहा कि देख, रन ज़रूरी हैं और पहली पारी में बढ़त लेना भी। अगर तुम आउट हो गए तो क्या होगा? उनकी बात सुनकर मैं थोड़ा रुक गया और टीम के लिए खेलने का फैसला किया।”भले ही आकाश 12 छक्के मारने का अपना सपना पूरा नहीं कर पाए, लेकिन उनकी यह पारी रणजी ट्रॉफी के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई है। यह दिखाता है कि आजकल के युवा खिलाड़ी किस निडर और आक्रामक सोच के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं।