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90 के दशक में 36 घंटे लगातार काम करती थीं रवीना टंडन, रास्ते में बदलते थे कपड़े

भारतीय सिनेमा जगत और विशेष तौर पर 90 के दशक के सुनहरे दौर को याद करते हुए आज भी फैंस के दिलों में एक अलग ही nostalgia जाग जाता है। उस दौर के सितारे किस तरह बिना किसी आधुनिक सुविधाओं के अपनी जान लगाकर फिल्मों की शूटिंग किया करते थे, इसकी बानगी हाल ही में बॉलीवुड की मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री रवीना टंडन ने एक साक्षात्कार के दौरान साझा की है। रवीना ने 90 के दशक के अपने शुरुआती और व्यस्त दिनों का वह किस्सा सुनाया जिसे सुनकर आज की युवा पीढ़ी और नए कलाकारों के होश उड़ जाएंगे। अभिनेत्री ने बताया कि उस समय न तो वैनिटी वैन की आधुनिक लग्जरी हुआ करती थी और न ही आराम करने का कोई निश्चित समय, बल्कि वे लोग एक दिन में 24 की जगह 36-36 घंटे लगातार काम करते थे और चलते-फिरते रास्तों में ही अपने कपड़े बदला करते थे। आइए 90 के दशक की उस सुनहरी और कठिन दुनिया, रवीना टंडन के इस संघर्ष भरे खुलासे और उस दौर की फिल्मी संस्कृति की पूरी और गहरी समीक्षा करते हैं।

90 के दशक की फिल्मी दुनिया और अभिनेताओं का कड़ा संघर्ष

आज के समय में जब हम बॉलीवुड या ओटीटी के बड़े सितारों की शूटिंग के सेट देखते हैं, तो वहां एयर-कंडीशन वैनिटी वैन, मेकअप आर्टिस्ट की फौज और तयशुदा काम के घंटे (8 से 10 घंटे) देखने को मिलते हैं। लेकिन 90 के दशक का बॉलीवुड ऐसा बिल्कुल नहीं था। उस दौर में गोविंदा, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन और करिश्मा कपूर जैसे सितारे एक साथ चार-चार शिफ्टों में काम किया करते थे। निर्माताओं के पास बजट की अपनी सीमाएं होती थीं और फिल्मों की रिलीज की तारीखें इतनी तेजी से तय होती थीं कि कलाकारों को बिना सोए लगातार स्टूडियों के चक्कर काटने पड़ते थे। रवीना टंडन ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके करियर के शुरुआती दौर में कई बार ऐसी स्थिति आती थी जब एक स्टूडियो की शिफ्ट खत्म होने के तुरंत बाद उन्हें बिना एक पल का आराम किए दूसरे सेट पर भागना पड़ता था।

"हम 24 में से 36 घंटे काम करते थे और रास्ते में बदलते थे कपड़े"

रवीना टंडन ने अपने उस अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उनके लिए समय की परिभाषा ही बदल चुकी थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में कलाकारों के पास इतने प्रोजेक्ट्स होते थे कि वे एक दिन यानी 24 घंटे में 36 घंटे के बराबर काम करते थे, जिसका मतलब था कि वे रात और दिन की परवाह किए बिना लगातार कैमरे के सामने एक्शन और रोमांस करते रहते थे। शूटिंग के बीच में जब एक लोकेशन से दूसरी लोकेशन पर गाड़ी से जाना होता था, तो वही गाड़ी उनके लिए ड्रेसिंग रूम बन जाती थी। रास्तों में ट्रैफिक के बीच या चलती कार में ही वे अपने कॉस्ट्यूम और मेकअप को बदलते थे ताकि अगले सेट पर समय पर पहुंचकर डायरेक्टर का इंतजार न कराना पड़े। यह अनुशासन और काम के प्रति यह अटूट निष्ठा ही थी जिसके कारण 90 के दशक के कलाकारों ने भारतीय सिनेमा को एक ऐसी मजबूती दी जो आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है।

आधुनिक वैनिटी वैन कल्चर और आज के दौर के बदलावों की तुलना

रवीना टंडन के इस खुलासे के बाद वर्तमान समय की फिल्म इंडस्ट्री और उस दौर की कार्यशैली के बीच का अंतर बहुत साफ नजर आता है। आज के समय में भले ही तकनीक और सुविधाएं बहुत आगे बढ़ चुकी हैं, और कलाकारों को हर तरह का व्यक्तिगत आराम और सुरक्षा मिलती है, लेकिन साथ ही वह कच्ची मेहनत और जमीन से जुड़ाव कहीं न कहीं कम होता दिख रहा है। आज जब कोई अभिनेता या अभिनेत्री थोड़ी सी थकान या असुविधा की शिकायत करते हैं, तो 90 के दशक के इन दिग्गजों का यह संघर्ष इस बात का अहसास कराता है कि सफलता कभी भी प्लेट में सजकर नहीं मिलती। रवीना टंडन जैसे कलाकारों ने अपनी जवानी के शुरुआती साल स्टूडियो की लाइटिंग, धूल और अनगिनत घंटों के तनाव के बीच बिताए हैं, तब जाकर उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है जिसे आज दुनिया 'सुपरस्टारडम' के नाम से जानती है।

फैंस के बीच चर्चा का विषय बना यह किस्सा और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

जैसे ही रवीना टंडन का यह इंटरव्यू और 90 के दशक के संघर्ष का यह किस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, फैंस ने इस पर अपनी जबरदस्त प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। इंस्टाग्राम और ट्विटर (एक्स) पर लोग रवीना की उस दौर की मेहनत की तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि आज के सितारों में उस तरह का समर्पण और शिद्दत देखने को नहीं मिलती। एक तरफ जहां युवा पीढ़ी इस बात से हैरान है कि बिना वैनिटी वैन के कोई कैसे इतने घंटे काम कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ 90 के दशक के सच्चे आशिक और सिनेप्रेमी इस दौर को याद करके पुरानी यादों में खो गए हैं। रवीना टंडन का यह बयान केवल एक पुरानी यादों का पिटारा नहीं है, बल्कि यह आने वाले नए कलाकारों के लिए एक अमूल्य सीख है कि कला और सिनेमा के प्रति सच्ची लगन और अनुशासन ही किसी भी इंसान को हमेशा के लिए अमर बना देता है।