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Delhi Amritsar Katra Expressway: वैष्णो देवी 6 घंटे और स्वर्ण मंदिर 4 घंटे दूर! ₹39,000 करोड़ का मेगा कॉरिडोर तैयार

उत्तर भारत में सड़क कनेक्टिविटी के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रहा दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे अब तेजी से धरातल पर उतर रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत लगभग 39,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार हो रहा यह 670 किलोमीटर लंबा नियंत्रित-पहुंच (Access-Controlled) ग्रीनफील्ड कॉरिडोर उत्तर भारत के सफर की पूरी तस्वीर बदलने के लिए तैयार है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को धार्मिक पर्यटन के दो सबसे बड़े केंद्रों—माता वैष्णो देवी (कटरा) और श्री हरमंदिर साहिब (अमृतसर)—से जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे न केवल समय की भारी बचत करेगा बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (पुराने जीटी रोड) पर लगने वाले भीषण जाम से भी मुसाफिरों को हमेशा के लिए राहत दिलाएगा।

दिल्ली से कटरा 6 घंटे और अमृतसर केवल 4 घंटे: सफर का नया दौर

वर्तमान समय में दिल्ली से कटरा जाने के लिए यात्रियों को पुराने रूट (लगभग 727 किलोमीटर) से 12 से 14 घंटे तक का लंबा और थकाऊ सफर तय करना पड़ता है। इसी तरह दिल्ली से अमृतसर की दूरी तय करने में लगभग 8 घंटे लग जाते हैं। नए दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद दिल्ली से कटरा की दूरी घटकर लगभग 588 किलोमीटर रह जाएगी और यह सफर महज 6 से 7 घंटे में पूरा हो सकेगा। वहीं दिल्ली से अमृतसर का 405 किलोमीटर का फासला केवल 4 घंटे में तय किया जा सकेगा। 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाले इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का समय आधा हो जाएगा।

रूट मैप और राज्यों का नेटवर्क: हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर का संगम

यह मेगा एक्सप्रेसवे दिल्ली के पास बहादुरगढ़ बॉर्डर और कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के पास निलोठी गांव से शुरू होता है। यह कॉरिडोर तीन राज्यों हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के प्रमुख जिलों को आपस में जोड़ता है:

  • हरियाणा: यह खंड लगभग 135 किमी लंबा है, जो झज्जर, रोहतक, सोनीपत, जींद, करनाल, कैथल और अंबाला से होकर गुजरता है।

  • पंजाब: पंजाब में यह पटियाला, संगरूर, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, तरनतारन, अमृतसर और गुरदासपुर को कवर करता है। नकोदर के पास यह मुख्य मार्ग दो हिस्सों में बंटता है।

  • अमृतसर स्पर (NE-5A): नकोदर से 99 किलोमीटर लंबा एक अलग ग्रीनफील्ड स्पर सीधे अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक जाता है।

  • जम्मू और कश्मीर (NE-5): मुख्य मार्ग गुरदासपुर और पठानकोट से आगे बढ़ते हुए कठुआ, सांबा, जम्मू रिंग रोड होते हुए त्रिकुटा पर्वत की तलहटी में बसे कटरा तक पहुंचता है।

आधुनिक इंजीनियरिंग, ब्यास नदी पर केबल-स्टेड ब्रिज और हाई-टेक सुविधाएं

यह 4-लेन का एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 8-लेन तक विस्तार योग्य डिजाइन किया गया है। जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बॉर्डर क्षेत्र में शिवालिक की पहाड़ियों के बीच यह परियोजना इंजीनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है। परियोजना के सबसे प्रमुख आकर्षणों में ब्यास नदी पर बनने वाला करीब 1,300 मीटर लंबा भव्य केबल-स्टेड ब्रिज (Cable-Stayed Bridge) और शिवालिक रेंज में बनाई जा रही अत्याधुनिक सुरंगे शामिल हैं। यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत के लिए पूरे रूट पर वे-साइड एमिनिटीज (Wayside Amenities), ट्रॉमा सेंटर, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड स्टेशन, हाई-टेक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, ट्रक ले-बाय और जीपीएस-आधारित ऑटोमैटिक टोल प्लाजा की व्यवस्था की जा रही है।

व्यापार, लॉजिस्टिक्स और धार्मिक पर्यटन को मिलेगा अभूतपूर्व बढ़ावा

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा विकसित किया जा रहा यह कॉरिडोर केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि उत्तर भारत का आर्थिक गलियारा बनेगा। पंजाब के औद्योगिक हब जैसे लुधियाना और जालंधर सीधे दिल्ली एनसीआर के बाजारों और बंदरगाहों से तेजी से जुड़ सकेंगे। कृषि उत्पादों, होजरी और मैन्युफैक्चरिंग गुड्स की ढुलाई तेज होने से लॉजिस्टिक्स लागत में भारी गिरावट आएगी। इसके साथ ही वैष्णो देवी, स्वर्ण मंदिर, तरनतारन साहिब और गोइंदवाल साहिब जैसे विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा बेहद सुगम हो जाने से होटल, टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय रोजगार को जबरदस्त गति मिलेगी।

चरणबद्ध तरीके से खुल रहा कॉरिडोर: जानिए कब तक पूरा होगा पूरा प्रोजेक्ट

परियोजना को दो मुख्य चरणों और 21 पैकेजों में विभाजित कर तैयार किया जा रहा है। हरियाणा के भीतर 135 किमी का हिस्सा काफी हद तक पूरा होकर संचालन स्थिति में पहुंच चुका है, जबकि पंजाब और जम्मू-कश्मीर के पैकेजों पर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण और पहाड़ी भौगोलिक चुनौतियों के समाधान के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस समूचे 670 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से जनता के लिए समर्पित करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इसके पूरी तरह शुरू होते ही दिल्ली से माता के दरबार कटरा तक का सड़क सफर किसी हवाई यात्रा की रफ्तार और आराम जैसा अनुभव देगा।