
अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चले आ रहे भीषण सीधे सैन्य टकराव को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक 'शांति समझौता' (US-Iran Peace Deal) भले ही परवान चढ़ चुका है, लेकिन खुद अमेरिकी महाशक्ति के भीतर ही इस डील की विश्वसनीयता को लेकर भारी अविश्वास और अंतर्विरोध पैदा हो गया है।
प्रतिष्ठित अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' (Axios) की एक बेहद चौंकाने वाली खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के निदेशक जॉन रैटक्लिफ (John Ratcliffe) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों को एक बेहद गोपनीय और गंभीर चेतावनी जारी की है। सीआईए चीफ ने इस डील को लेकर ईरान की वास्तविक नीयत और कूटनीतिक ईमानदारी पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों द्वारा इंटरसेप्ट किए गए इनपुट्स के अनुसार, ईरानी हुक्मरान और सैन्य अधिकारी बंद कमरों में आपस में इस समझौते को लेकर कुछ और ही खतरनाक खिचड़ी पका रहे हैं, जबकि दुनिया के मध्यस्थ देशों और अमेरिका के सामने वे बेहद शरीफ और नियम मानने वाली तस्वीर पेश कर रहे हैं।
सीआईए (CIA) को आखिरकार ईरान पर इतना गहरा शक क्यों है?
एक्सियोस की रिपोर्ट में वाशिंगटन के कूटनीतिक गलियारों से लीक हुई खुफिया बैठकों का पूरा ब्योरा दिया गया है, जिसके अनुसार:
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परमाणु शर्तों को तोड़ने की साजिश: सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर ब्रीफ करते हुए कहा कि वाशिंगटन के पास उपलब्ध पुख्ता और तकनीकी खुफिया जानकारी (Intelligence Inputs) यह साफ संकेत देती है कि ईरान उन सख्त परमाणु शर्तों (Nuclear Restraints) को जमीन पर मानने के बिल्कुल मूड में नहीं है, जिनकी मांग अमेरिका ने इस संधि के तहत की है।
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कथनी और करनी में बड़ा अंतर: व्हाइट हाउस के एक अंदरूनी वरिष्ठ सूत्र ने एक्सियोस को बताया, "हमारे पास जो खुफिया इंटरसेप्ट्स और जमीनी इनपुट्स आए हैं, उनसे स्पष्ट होता है कि ईरान की असली सामरिक मंशा और अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत दुनिया के सामने किए गए वादों में जमीन-आसमान का फर्क है।" तेहरान केवल अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी को हटवाने के लिए इस समय कागजों पर हामी भर रहा है।
सीआईए प्रमुख के साथ खड़े हुए विदेश और रक्षा मंत्री; ट्रंप प्रशासन में दो फाड़
इस सीक्रेट रिपोर्ट के सामने आने के बाद वाशिंगटन में बंद कमरों के भीतर होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की बैठकों में हड़कंप मच गया है। ईरान की इस दोहरी चाल को लेकर केवल सीआईए ही नहीं, बल्कि ट्रंप कैबिनेट के दो सबसे कद्दावर और कड़क रुख रखने वाले मंत्री भी बेहद आक्रामक हो गए हैं:
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विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio): अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आंतरिक वार्ताओं में इस डील को अमेरिकी हितों और मध्य पूर्व (Middle East) में उसके सबसे पक्के दोस्त इजरायल की सुरक्षा के खिलाफ बताया है। उनका मानना है कि ईरान पर से प्रतिबंध हटाना एक ऐतिहासिक भूल साबित होगी।
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रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth): पेंटागन के प्रमुख और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी मिलिट्री जनरलों के साथ हुई बैठक में चिंता जताते हुए कहा है कि ईरान इस 60 दिनों के युद्धविराम और शांति समझौते के बफर टाइम का इस्तेमाल अपने भूमिगत परमाणु ठिकानों (जैसे नतांज और फोर्डो) को और अधिक सुरक्षित करने तथा अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को री-लोकेट करने के लिए कर रहा है।
'होर्मुज' खोलने के बदले नाकेबंदी हटाने का खेल पड़ेगा भारी?
गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस डील को अपनी अब तक की सबसे बड़ी राजनयिक सफलता (Diplomatic Victory) मान रहे हैं, जिसके तहत ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को पूरी दुनिया के व्यापार के लिए खोलने पर राजी हुआ है और इसके एवज में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) हटाने जा रहा है।
लेकिन खुफिया समुदाय (Intelligence Community) का मानना है कि जैसे ही अमेरिका ने अपने कदम पीछे खींचे, ईरान अपने परमाणु सेंट्रीफ्यूज की रफ्तार को चुपके से बढ़ाकर परमाणु बम (Nuclear Weapon) तैयार कर लेगा। अगर सीआईए के ये दावे सच साबित होते हैं, तो डोनाल्ड ट्रंप का यह शांति समझौता दुनिया में अमन लाने के बजाय अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच एक और अधिक विनाशकारी व बड़े महायुद्ध की भूमिका तैयार कर देगा।
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