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अब मुंबई-सूरत दूर नहीं! लखनऊ में ही मिलेगा 2 लाख लोगों को रोजगार, बनने जा रहा है कपड़े का सबसे बड़ा ‘शहर’

अब तक जब भी कपड़े के बड़े काम या टेक्सटाइल इंडस्ट्री की बात होती थी,तो हमारे दिमाग में सूरत,मुंबई या तिरुपुर जैसे शहरों का नाम आता था। उत्तर प्रदेश,और खासकर लखनऊ के युवाओं को भी नौकरी की तलाश में अक्सर इन्हीं शहरों का रुख करना पड़ता था।लेकिन अब यह कहानी,और लखनऊ की पहचान,दोनों ही बदलने वाली है।लखनऊ की धरती पर एक ऐसे‘महा-प्रोजेक्ट’की नींव रखी जा रही है,जो न सिर्फ शहर को एक नई पहचान देगा,बल्किदो लाख से भी ज्यादा लोगोंके लिए रोजगार के नए दरवाजे खोलेगा। हम बात कर रहे हैंपीएम मित्र पार्क (PM Mitra Park)की।क्या है यह पीएम मित्र पार्क? (यह कोई आम पार्क नहीं है!)यह कोई घूमने-फिरने वाला पार्क नहीं,बल्कि यह कपड़ा उद्योग का एक पूरा‘शहर’होगा,जिसेलखनऊ-हरदोई रोडपर लगभग1,000एकड़ की विशाल जमीन पर बसाया जा रहा है।इसका मकसद है‘एक ही छत के नीचे सब कुछ’मुहैया कराना। मतलब:यहीं कपास से धागा बनेगा।धागे से कपड़ा बुना जाएगा।कपड़े की रंगाई और छपाई होगी।और फिर उसी कपड़े से फैशनेबल गारमेंट्स (कपड़े) तैयार किए जाएंगे।इसे’फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन’ (Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign)का कॉन्सेप्ट कहा जा रहा है। यानी,खेत से लेकर विदेशी बाजार तक,सब कुछ एक ही जगह से होगा।आम आदमी को इससे क्या मिलेगा?यही इस प्लान की सबसे खूबसूरत बात है।रोजगार ही रोजगार:इस एक पार्क से1लाख लोगों को सीधी नौकरी (डायरेक्ट जॉब)और2लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से (इनडायरेक्ट) रोजगारमिलेगा। अब लखनऊ और आसपास के जिलों के युवाओं को अपना घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की मजबूरी नहीं होगी।तरक्की की नई सड़क:जिस लखनऊ-हरदोई रोड पर यह पार्क बन रहा है,उसके आसपास के गांवों और कस्बों की तो जैसे किस्मत ही बदल जाएगी। नई सड़कें,नई दुकानें,नए घर… पूरा इलाका ही विकसित हो जाएगा।निवेश की बरसात:देश और दुनिया की बड़ी-बड़ी कपड़ा कंपनियां यहां अपनी फैक्ट्री लगाने के लिए आ रही हैं,जिससे लखनऊ अब सिर्फ नवाबों का शहर नहीं,बल्कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा‘टेक्सटाइल हब’बन जाएगा।यह सिर्फ एक फैक्ट्री या पार्क नहीं है,यह लाखों परिवारों के सपनों को पंख देने और लखनऊ को विकास की एक नई सुपर-फास्ट ट्रेन पर बैठाने का एक सुनहरा मौका है।