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बाबा साहेब को याद करते हुए मायावती का दर्द छलका, बोलीं संविधान तो बचा लिया, पर हक कब मिलेगा?

News India Live, Digital Desk : आज 6 दिसंबर है। भारत के इतिहास का एक बहुत ही भावुक और महत्वपूर्ण दिन। आज ही के दिन हमारे संविधान के निर्माता और हम सबके मसीहा डॉ. भीमराव अंबेडकर जी हमें छोड़कर चले गए थे। पूरा देश आज उन्हें नम आँखों से याद कर रहा है, उन्हें नमन कर रहा है।लेकिन दोस्तों, इस शहादत दिवस (महापरिनिर्वाण दिवस) पर उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा भी चढ़ा हुआ है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती (Mayawati) जी ने आज बाबा साहेब को श्रद्धांजलि तो दी, लेकिन साथ ही सत्ताधारी सरकार (BJP) और कांग्रेस दोनों को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर बहनजी ने ऐसा क्या कह दिया है जो सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।”अच्छे दिनों” का क्या हुआ?हम सबने पिछले कई सालों से एक नारा सुना है”अच्छे दिन आएंगे।” मायावती जी ने आज इसी नारे पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने बहुत ही तीखे लहज़े में पूछा कि सरकार यह बताए कि देश के करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और गरीबों के ‘अच्छे दिन’ आखिर कब आएंगे?उनका कहना एकदम साफ़ था। उन्होंने कहा कि कागजों पर और भाषणों में तो सब चंगा सी, लेकिन हकीकत यह है कि गरीब आज भी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। महंगाई आसमान छू रही है, बेरोजगारी ने युवाओं की कमर तोड़ दी है और गरीबी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है।नौकरियों का अकाल और आरक्षणमायावती ने युवाओं के दर्द पर हाथ रखते हुए कहा कि सरकारी नौकरियां तो अब सपना हो गई हैं। और जो थोड़ी-बहुत भर्तियां निकलती भी हैं, उनमें ‘आरक्षण’ (Reservation) का बैकलॉग पूरा नहीं किया जाता। उनका इशारा साफ़ था कि बहुजन समाज के हक को अभी भी ईमानदारी से नहीं दिया जा रहा है। सरकारें बदलती हैं, चेहरे बदलते हैं, लेकिन दलित और पिछड़े समाज का शोषण नहीं रुकता।कांग्रेस भी लपेटे मेंमजेदार बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ बीजेपी को नहीं कोसा, बल्कि कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि बाबा साहेब को भारत रत्न देने में किस पार्टी ने देरी की थी। उनका मतलब साफ़ था चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी, दोनों ही पार्टियों ने दलितों को सिर्फ वोट बैंक समझा है।”सत्ता की चाबी खुद लेनी होगी”अंत में, मायावती ने अपने समर्थकों को एक ही मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि दूसरों के भरोसे बैठने से कुछ नहीं होगा। अगर बाबा साहेब के सपनों को सच करना है, और वाकई में ‘अच्छे दिन’ चाहिए, तो बहुजन समाज को एकजुट होकर सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेनी होगी। यानी उन्होंने आने वाले चुनावों के लिए हुंकार भर दी है।