
News India Live, Digital Desk : क्या आपको भी कभी-कभी ऐसा लगता है कि आपका मोबाइल आपकी बातें सुन रहा है या आप जहां जा रहे हैं, उस पर नज़र रख रहा है? खैर, यह डर हकीकत में बदल सकता है। अभी हम और आप ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) पोर्टल के फायदों और नियमों को ठीक से समझ भी नहीं पाए थे कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक और बड़ी खबर ने तहलका मचा दिया है।खबर यह है कि भारत सरकार स्मार्टफोन्स के लिए ए-जीपीएस (A-GPS) को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है। यह सुनकर मोबाइल बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां (जैसे Apple और Samsung) और प्राइवेसी को लेकर चिंता करने वाले लोग सकते में आ गए हैं।आइए, बिल्कुल देसी और आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर माजरा क्या है और यह फैसला आपकी ज़िंदगी पर क्या असर डालेगा।सबसे पहले समझें: आखिर ये A-GPS बला क्या है?हम सब ‘GPS’ का इस्तेमाल रास्ता खोजने के लिए करते हैं। यह सीधे सैटेलाइट से जुड़कर काम करता है। लेकिन A-GPS (Assisted GPS) इसका ‘पापा’ है।साधारण जीपीएस को सिग्नल पकड़ने में टाइम लगता है और यह कभी-कभी अटक जाता है। वहीं, A-GPS आपके मोबाइल नेटवर्क (टावर) और इंटरनेट की मदद लेता है। यह इतना तेज और सटीक होता है कि अगर आप किसी इमारत के अंदर भी छिपे हैं, तो भी यह आपकी एकदम सटीक लोकेशन (Pin-point Location) बता सकता है।सरकार ऐसा क्यों करना चाहती है?सरकार का मक़सद, हमेशा की तरह, हमारी ‘सुरक्षा’ है।अधिकारियों का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति के साथ कोई हादसा होता है या वो इमरजेंसी नंबर (जैसे 112) डायल करता है, तो पुलिस या एम्बुलेंस को उस तक पहुंचने में देर नहीं होनी चाहिए। A-GPS होने से कॉलर की लोकेशन सेकंड्स में ट्रेस हो जाएगी। इसके अलावा, अपराध रोकने और मुजरिमों को पकड़ने में भी यह बहुत मददगार होगा।विवाद और डर की वजह क्या है? (कंपनियां क्यों कर रही हैं विरोध)सुनने में तो सुरक्षा वाली बात अच्छी लगती है, लेकिन इसके पीछे कुछ पेचीदा सवाल भी हैं, जिन्होंने मोबाइल कंपनियों की नींद उड़ा दी है।प्राइवेसी का खात्मा? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यूजर्स को इस लोकेशन ट्रैकिंग को ‘बंद’ (OFF) करने का ऑप्शन मिलेगा? अगर नहीं, तो इसका मतलब है कि कोई 24 घंटे हम पर नज़र रख सकता है। यह हमारी निजी आज़ादी के लिए खतरनाक हो सकता है।बैटरी की बलि: मोबाइल कंपनियां (जो ICEA संस्था के जरिए अपनी बात रख रही हैं) का कहना है कि अगर फोन में A-GPS वाला सिस्टम लगातार चालू रहा या अनिवार्य किया गया, तो फोन की बैटरी बहुत तेजी से ड्रेन होगी।फोन महंगे होंगे: इस टेक्नोलॉजी को हर फोन में (खासकर सस्ते फोन्स में) लगाने के लिए हार्डवेयर में बदलाव करने पड़ेंगे, जिससे आपके मोबाइल का बिल बढ़ सकता है।संचार साथी के बाद दूसरा बड़ा झटकाआपको याद होगा कि अभी कुछ समय पहले ‘खोए हुए मोबाइल को ब्लॉक और ट्रैक’ करने के लिए संचार साथी पोर्टल लॉन्च हुआ था, जिसकी लोगों ने तारीफ की। लेकिन यह नया A-GPS वाला प्रस्ताव थोड़ा अलग है क्योंकि यह मोबाइल के अंदरूनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से जुड़ा है। मोबाइल मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि यह “असंभव और अव्यवहारिक” मांग है।
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