
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जुबानी जंग एक बार फिर चरम पर है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) चीफ और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर को लेकर एक ऐसा दावा किया है, जिसने यूपी के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अखिलेश यादव ने इशारों-इशारों में सुभासपा और भाजपा के गठबंधन पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव के नाम पर राजभर के साथ बड़ा 'खेल' कर रही है।
"पैसा एडवांस लिया है, अब लोग ढूंढ रहे हैं"
कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर तीखा प्रहार करते हुए लिखा, "भविष्यवाणी करने वाले अपनी पार्टी की भविष्यवाणी करें कि भाजपा उन्हें 75 सीट दे रही है, 50 या फिर सिर्फ आश्वासन?" अखिलेश ने आगे सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि सुभासपा ने गठबंधन के नाम पर 30 सीटें मिलने की अफवाह फैलाकर जो पैसा एडवांस में लिया है, अब उन सीटों के लिए वे लोग इन्हें ढूंढ रहे हैं। अखिलेश का यह बयान सपा और सुभासपा के बीच बढ़ती खटास को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
रामगोपाल यादव के बयान पर शुरू हुआ विवाद
यह वाकया तब और गहरा गया जब बुधवार, 17 जून को ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव की एक चिट्ठी का जिक्र करते हुए दावा किया था कि सपा में जल्द बड़ी टूट हो सकती है। राजभर के इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने मोर्चा संभालते हुए उन पर टिकट के बदले पैसे लेने का आरोप जड़ दिया।
राजभर का पलटवार: "गोमती रिवर फ्रंट के पापियों का नाम लिखूंगा तो भूचाल आ जाएगा"
अखिलेश यादव के पोस्ट के बाद ओपी राजभर ने भी देर नहीं की और कड़े शब्दों में जवाब दिया। राजभर ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए लिखा, "अरे अखिलेश यादव, अभी तो मैंने सिर्फ राम गोपाल यादव की चिट्ठी का जिक्र किया है। अगर मैंने खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट के पापियों का नाम सार्वजनिक कर दिया, तो उत्तर प्रदेश में भूचाल आ जाएगा।" राजभर ने आगे तंज कसते हुए कहा कि पूरा यूपी जानता है कि 'लाल टोपी' वाले भ्रष्टाचार के मास्टरमाइंड कौन हैं और रामगोपाल यादव किसे बचाने के लिए सौदेबाजी कर रहे हैं।
2027 के चुनाव से पहले तेज हुई रार
अखिलेश और राजभर के बीच का यह ताजा विवाद 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने से पहले की एक बानगी है। जहां एक ओर अखिलेश यादव भाजपा पर सहयोगियों को सिर्फ 'आश्वासन' देकर ठगने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजभर ने सपा के पुराने घोटालों को कुरेदकर विपक्ष को बैकफुट पर लाने की कोशिश की है। अब जनता यह देख रही है कि यह जुबानी जंग केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में यह गठबंधन की राजनीति में और बड़े बदलावों का कारण बनेगी।
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