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अखिलेश यादव का बड़ा हमला बोले शिक्षामित्र हर सीट पर बनेंगे भाजपा का सिरदर्द, हार के डर से बढ़ाया मानदेय

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की सियासत में शिक्षामित्रों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में जो बढ़ोतरी की है, वह उनका सम्मान नहीं बल्कि भाजपा का ‘हार का डर’ है। अखिलेश ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आगामी चुनावों में शिक्षामित्र हर सीट पर भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी करने वाले हैं।’मानदेय नहीं, यह हार का खौफ है’अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और जनसभाओं के माध्यम से योगी सरकार की घेराबंदी करते हुए कहा कि साढ़े सात साल तक शिक्षामित्रों की सुध न लेने वाली भाजपा को चुनाव नजदीक आते ही उनकी याद आ रही है। उन्होंने मानदेय वृद्धि को ‘चुनावी लॉलीपॉप’ करार दिया। सपा अध्यक्ष का दावा है कि शिक्षामित्रों के साथ जो अन्याय हुआ है, उसका हिसाब वे आने वाले समय में हर विधानसभा और लोकसभा सीट पर भाजपा को हराकर लेंगे।शिक्षामित्रों के आंदोलन और सपा का समर्थनउत्तर प्रदेश में लंबे समय से शिक्षामित्र नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। अखिलेश यादव शुरू से ही उनके पक्ष में खड़े नजर आए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सपा सरकार के दौरान शिक्षामित्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के कदम उठाए गए थे, जिसे मौजूदा सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। अखिलेश ने कहा कि अब शिक्षामित्र जागरूक हो चुके हैं और वे भाजपा के इस ‘सिरदर्द’ का इलाज वोट की चोट से करेंगे।हर सीट पर घेराबंदी की रणनीतिसपा प्रमुख ने कहा कि शिक्षामित्र केवल एक कर्मचारी समूह नहीं हैं, बल्कि उनका हर गांव और हर परिवार में प्रभाव है। भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ‘डबल इंजन’ की सरकार ने युवाओं और शिक्षकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। अब यही आक्रोश भाजपा की सीटों पर भारी पड़ेगा। सपा ने साफ किया है कि अगर वे सत्ता में आते हैं, तो शिक्षामित्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालेंगे।भाजपा का पलटवार और चुनावी गणितदूसरी तरफ, भाजपा ने अखिलेश के बयानों को भ्रामक बताया है। सरकार का तर्क है कि उन्होंने बजट और संसाधनों के आधार पर मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि की है। हालांकि, उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षामित्रों की संख्या और उनका प्रभाव इतना बड़ा है कि कोई भी दल उन्हें नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। अखिलेश के इस ताजा बयान ने चुनावी माहौल में एक नई बहस छेड़ दी है।