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अलीमा खान के सनसनीखेज खुलासे से हिला पाकिस्तान: ऑपरेशन सिंदूर’ पर बड़ा सच आया सामने

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर से बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। इस बार इस सियासी तूफान के केंद्र में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई (PTI) प्रमुख इमरान खान की बहन अलीमा खान हैं। अलीमा खान ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर कुछ बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे किए थे। उन्होंने सीधे तौर पर देश की सैन्य स्थापना और मौजूदा सरकार की गुप्त रणनीतियों पर उंगली उठाई है। अलीमा खान के इस बेबाक बयान ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय (GHQ) तक हड़कंप मचा दिया है।

पाकिस्तान सरकार का बड़ा एक्शन: सच बोलते ही थमाया गया कानूनी नोटिस

जैसे ही अलीमा खान का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मुख्यधारा की मीडिया की सुर्खियों में आया, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गई। संघीय जांच एजेंसी (FIA) और सरकारी वकीलों की ओर से बिना वक्त गंवाए अलीमा खान को एक कड़ा कानूनी नोटिस भेज दिया गया है। सरकार का आरोप है कि अलीमा खान देश की सुरक्षा एजेंसियों और राज्य के महत्वपूर्ण संस्थानों के खिलाफ झूठा प्रोपेगैंडा फैला रही हैं और जनता को भड़काने की कोशिश कर रही हैं। इस नोटिस के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

आखिर क्यों डरे सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर? इनसाइड स्टोरी आई सामने

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस खुलासे से पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर क्यों असहज हो गए हैं? रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' का सीधा संबंध पाकिस्तान सेना के कुछ ऐसे गुप्त ऑपरेशन्स या राजनीतिक जोड़-तोड़ से है, जिसे सेना हर हाल में दुनिया की नजरों से छिपाकर रखना चाहती थी। अलीमा खान ने सीधे तौर पर सेना की इसी दुखती रग पर हाथ रख दिया है। इमरान खान की बढ़ती लोकप्रियता और जेल में होने के बावजूद उनकी बहन के इन तीखे तेवरों से सैन्य नेतृत्व बैकफुट पर नजर आ रहा है।

इमरान खान की पार्टी PTI ने संभाला मोर्चा: शहबाज सरकार को दी खुली चुनौती

अलीमा खान को नोटिस मिलने के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीटीआई के प्रवक्ताओं का कहना है कि यह सरकार और सेना की घबराहट को दर्शाता है। इमरान खान के परिवार को डराने और चुप कराने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नजरें भी अब इस मामले पर टिक गई हैं, क्योंकि पाकिस्तान में विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों पर कानूनी कार्रवाई का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है।