
लोकआस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हो चुकी है और’नहाय-खाय’के बाद आज है इस पूजा का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव-खरना। खरना का मतलब होता है’शुद्धिकरण’। यह सिर्फ एक पूजा या प्रसाद नहीं,बल्कि यह व्रतियों (व्रत रखने वालों) के उस36घंटे के निर्जला (बिना पानी के) महाव्रत की तैयारी है,जो दुनिया के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।क्या होता है खरना और इसका क्या है महत्व?खरना वाले दिन,व्रती पूरे दिन बिना अन्न-जल के उपवास रखते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद विशेष प्रसाद बनाया जाता है। इसी प्रसाद को खाकर व्रती अपने शरीर और मन को आने वाले36घंटों की कठिन तपस्या के लिए तैयार करते हैं। यह प्रसाद ग्रहण करने के बाद से ही उनका सबसे मुश्किल निर्जला व्रत शुरू हो जाता है,जो उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही संपन्न होता है।खरना का शुभ मुहूर्त:इस साल खरना की पूजा और प्रसाद का अर्पणआज (26अक्टूबर,रविवार)को सूर्यास्त के बाद,यानीशाम5:41बजे के बादकिया जाएगा।क्या बनता है खरना के प्रसाद में? (शुद्धता का प्रतीक)खरना का प्रसाद बेहद सात्विक और शुद्ध होता है। इसमें तीन चीजें मुख्य रूप से बनाई जाती हैं:रसियाव (गुड़ की खीर):इसे आम की लकड़ी पर मिट्टी के नए चूल्हे में बनाया जाता है। यह खीर चावल,दूध और गुड़ से बनती है,इसमें चीनी का इस्तेमाल नहीं होता।गेंहू की रोटी (सोहारी):यह बिना नमक की सादी रोटी होती है,जिस पर हल्का-सा घी लगा होता है।फल:केला और अन्य सात्विक फल भी प्रसाद में शामिल होते हैं।यह प्रसाद बनाने से पहले पूरी रसोई को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है और इसमें लहसुन-प्याज जैसी कोई भी तामसिक चीज़ का इस्तेमाल नहीं होता।एक नियम,जो कभी नहीं टूटता: इस बर्तन का न करें इस्तेमालछठ पूजा में शुद्धता का इतना ध्यान रखा जाता है कि प्रसाद बनाने वाले बर्तन भी खास होते हैं।किसमें बनाएं:खरना का प्रसाद बनाने के लिए हमेशामिट्टी,पीतल या कांसेके बर्तनों का ही इस्तेमाल किया जाता है।किसमें न बनाएं:इस पूजा मेंएल्युमिनियम के बर्तन का इस्तेमाल करना सख्त वर्जितमाना गया है।क्यों है यह मनाही?इसके पीछे धार्मिक औरवैज्ञानिक,दोनों कारण हैं। धार्मिक रूप से एल्युमिनियम को अशुद्ध धातु माना गया है,इसलिए इसे पूजा के काम में नहीं लिया जाता। वहीं,वैज्ञानिक रूप से एल्युमिनियम गर्म होने पर खाने में कुछ ऐसे तत्व छोड़ सकता है,जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।खरना का यह दिन व्रतियों की सहनशक्ति,संयम और अटूट आस्था की असली परीक्षा की शुरुआत है।
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