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आसाराम की अंतरिम जमानत पर फैसला टला, सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS को दिए यह कड़े निर्देश

धार्मिक मामलों से जुड़े बहुचर्चित मामलों के केंद्र बिंदु रहे आसाराम बापू की अंतरिम जमानत याचिका पर देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान एक नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी स्वास्थ्य के आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, बल्कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान यानी एम्स (AIIMS) को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि याचिकाकर्ता की चिकित्सीय स्थिति को लेकर किसी भी प्रकार का संशय न रहे। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली कानूनी कार्यवाही और कोर्ट द्वारा दिए गए ताजा निर्देशों को आइए विस्तार से समझते हैं।

स्वास्थ्य रिपोर्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से उनके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत दिए जाने की जोरदार मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने बिना पुख्ता और आधिकारिक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के सीधे राहत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने एम्स (AIIMS) प्रशासन को यह निर्देश दिया है कि वे एक विशेष डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित करें जो आसाराम के वर्तमान स्वास्थ्य, बीमारियों और अस्पताल में दी जा रही चिकित्सीय देखभाल की गहन जांच करे। अदालत का यह साफ मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया में चिकित्सा के दस्तावेजों की प्रामाणिकता सबसे ऊपर होती है, इसलिए निष्पक्ष और सटीक रिपोर्ट आने के बाद ही जमानत याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।

अब आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया और डॉक्टरों की रिपोर्ट का इंतजार

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब सभी की निगाहें एम्स के मेडिकल बोर्ड की आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। मेडिकल रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि आसाराम की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति जेल से बाहर रहकर इलाज कराने जितनी गंभीर है या फिर उनका इलाज जेल के भीतर या अस्पताल की निगरानी में आसानी से किया जा सकता है। अदालत इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय करेगी कि उन्हें अंतरिम जमानत का लाभ मिलना चाहिए या नहीं। इस कानूनी खिंचाव के चलते उनके समर्थकों और कानूनी टीम को अभी कुछ और दिन इंतजार करना पड़ सकता है।