
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया के सुलगते रेगिस्तान में शांति की एक नई किरण दिखाई दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के बाद इज़रायल और लेबनान के बीच ‘240 घंटे’ यानी 10 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति बन गई है। भारतीय समय के अनुसार 16 अप्रैल की शाम 5 बजे से प्रभावी हुए इस समझौते ने दुनिया भर की सांसें थाम दी हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज एक अस्थायी ब्रेक है या फिर ईरान के साथ चल रहे भीषण संघर्ष को खत्म करने की दिशा में पहला बड़ा कदम?ट्रंप की ’10-दिन वाली’ डील और हिजबुल्लाह का रुखइस समझौते को ‘240-Hour Deal’ के नाम से जाना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह 10 दिन का समय दोनों पक्षों को कूटनीतिक मेज पर लाने और भविष्य की स्थायी रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, हिजबुल्लाह ने साफ कर दिया है कि वह इस युद्धविराम का पालन तभी करेगा जब इज़रायली सेना लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करेगी। वहीं, इज़रायली कैबिनेट के भीतर इस डील को लेकर भारी मतभेद थे, लेकिन अमेरिकी दबाव के बाद नेतन्याहू सरकार ने इसे फिलहाल हरी झंडी दे दी है।ईरान के साथ युद्ध पर क्या होगा असर?विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में शांति होने से इज़रायल और अमेरिका का पूरा ध्यान अब सीधे तौर पर ईरान पर केंद्रित हो जाएगा। भू-राजनीतिक विश्लेषक ब्रह्म चेलानी के अनुसार, ईरान इस समय का उपयोग अपनी मिसाइल यूनिटों को फिर से संगठित (Reconstitute) करने के लिए कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, इज़रायल के लिए यह अपनी सेना को ‘री-ग्रुप’ करने और ईरान के परमाणु ठिकानों के खिलाफ अगली रणनीति तैयार करने का मौका है। यदि यह युद्धविराम सफल रहता है, तो ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ सकता है।लिटानी नदी तक का ‘डेथ जोन’ और नई शर्तेंसमझौते की शर्तों के अनुसार, हिजबुल्लाह को अपनी ताकत लिटानी नदी के उत्तर में समेटनी होगी। इज़रायली सेना ने स्पष्ट किया है कि वे दक्षिणी लेबनान के कब्जाए गए क्षेत्रों से फिलहाल पीछे नहीं हटेंगे। यह स्थिति लेबनान सरकार के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे वहां एक ‘बफर जोन’ बन गया है। इस 240 घंटे की अवधि में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय टीमें यह निगरानी करेंगी कि क्या वास्तव में हथियारों की आवाजाही बंद हुई है या पर्दे के पीछे नई जंग की तैयारी चल रही है।क्या फेल हो जाएगा शांति का यह दांव?इतिहास गवाह है कि पश्चिम एशिया में युद्धविराम अक्सर ‘शांति’ से ज्यादा ‘अगले हमले की तैयारी’ के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं। 2024 के विफल समझौते के बाद अब 2026 में हुए इस नए प्रयास पर भी संकट के बादल हैं। ईरान ने धमकी दी है कि अगर इज़रायल ने लेबनान में हमला जारी रखा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह बंद कर देगा, जिससे पूरी दुनिया में तेल का संकट गहरा सकता है। ऐसे में यह 10 दिन का समय तय करेगा कि दुनिया एक बड़ी जंग से बचेगी या और गहरे संकट में धंस जाएगी।
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