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ईरान युद्ध ने बिगाड़ा तरबूज का जायका: खाड़ी देशों में निर्यात ठप होने से मंडियों में 29% गिरे दाम, किसानों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और ईरान युद्ध की तपिश अब भारतीय खेतों तक पहुंच गई है। खाड़ी देशों में निर्यात ठप होने के कारण देश के फल बाजारों में ‘तरबूज’ की मिठास फीकी पड़ती नजर आ रही है। रमजान के इस पवित्र महीने में, जब आमतौर पर भारतीय तरबूज की विदेशों में भारी मांग रहती थी, वहां अब सप्लाई रुकने से घरेलू मंडियों में माल भर गया है। नतीजा यह है कि तरबूज की कीमतें औंधे मुंह गिर गई हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।रमजान में निर्यात पर लगा ‘ब्रेक’, मंडियों में लगा तरबूजों का अंबारभारत से हर साल भारी मात्रा में तरबूज और खरबूजे कतर, यूएई (UAE), बहरीन और ओमान जैसे खाड़ी देशों को भेजे जाते हैं। रमजान के दौरान इन देशों में फलों की खपत काफी बढ़ जाती है, लेकिन इस साल ईरान युद्ध ने सारा समीकरण बिगाड़ दिया है। युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में असुरक्षा और एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों की वजह से बड़े-बड़े शिपमेंट बीच में ही रुक गए हैं। निर्यात के लिए तैयार किया गया माल अब स्थानीय मंडियों में खपाया जा रहा है, जिससे बाजार में जरूरत से ज्यादा आवक (Over-supply) हो गई है और कीमतें तेजी से नीचे आ गई हैं।आजादपुर मंडी का हाल: एक महीने में 29 प्रतिशत तक की गिरावटएशिया की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी कही जाने वाली दिल्ली की ‘आजादपुर मंडी’ से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। फरवरी महीने में जिस तरबूज का थोक भाव ₹3,275 प्रति क्विंटल के करीब था, मार्च आते-आते वह गिरकर ₹2,301 पर सिमट गया है। यानी महज एक महीने के भीतर कीमतों में 29% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल के ₹1,482 प्रति क्विंटल के मुकाबले दाम अब भी कुछ बेहतर हैं, लेकिन निर्यात बंद होने से होने वाला नुकसान इसकी भरपाई नहीं कर पा रहा है।सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, ₹7 किलो तक पहुंचे दामतरबूज की गिरती कीमतों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी बहस तेज हो गई है। कर्नाटक के प्रमुख कृषि उद्यमी अरुणा उर्स ने दावा किया है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में तरबूज की कीमत गिरकर महज ₹7 प्रति किलो तक रह गई है। किसानों का कहना है कि कुछ समय पहले तक जो प्रीमियम क्वालिटी का तरबूज ₹25 प्रति किलो तक बिक रहा था, उसे अब व्यापारी ₹6-7 में भी खरीदने को तैयार नहीं हैं। लागत तक न निकलने की वजह से किसान अब अपनी फसल को लेकर काफी मायूस नजर आ रहे हैं।आम आदमी को राहत नहीं: मंडियों में मंदी, ऐप्स पर अब भी ‘महंगाई’ की मारहैरानी की बात यह है कि थोक मंडियों में कीमतें गिरने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को इसका कोई खास फायदा नहीं मिल रहा है। एक तरफ जहां किसान कौड़ियों के दाम फसल बेचने को मजबूर हैं, वहीं ‘क्विक कॉमर्स’ प्लेटफॉर्म्स जैसे Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart पर तरबूज के दाम अब भी आसमान छू रहे हैं। दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में ऑनलाइन ऐप्स पर तरबूज ₹100 प्रति किलो के पार बिक रहा है, जबकि बेंगलुरु में यह ₹80 के आसपास है। बिचौलियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के भारी मार्जिन के कारण खुदरा ग्राहक सस्ते फलों के फायदे से अब भी महरूम हैं।