
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने ग्लोबल डिफेंस एक्सपर्ट्स के भी होश उड़ा दिए हैं। ईरान के साथ कथित तौर पर चली पांच महीने लंबी लंबी और भीषण जंग ने अमेरिकी सेना की पोल खोलकर रख दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि लंबे संघर्षों से निपटने की उसकी ताकत और सैन्य क्षमता अंदर से कितनी खोखली हो चुकी है। इस जंग के बाद अमेरिकी रक्षा तंत्र की कमियां दुनिया के सामने खुलकर आ गई हैं, जिसे आठ मुख्य बिंदुओं के जरिए बेहद आसानी से समझा जा सकता है।
मिलिट्री पावर और साजो-सामान का भारी संकट
इस पूरे घटनाक्रम और जंग के दौरान सबसे बड़ा पहलू यह सामने आया है कि लगातार चलने वाले युद्धों के कारण अमेरिका के आधुनिक हथियारों और मिसाइलों के भंडार में भारी कमी आ गई है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि अत्याधुनिक सैन्य साजो-सामान के उत्पादन की रफ्तार उस गति से नहीं हो पा रही है जितनी तेजी से जंग में उनका इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा, युद्ध के लंबे खिंचने से अमेरिकी रक्षा बजट पर भी अत्यधिक दबाव पड़ा है, जिससे देश के भीतर आर्थिक और सामरिक मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
महाशक्ति की रणनीतिक विफलताओं का सच
ईरान के साथ हुए इस लंबे गतिरोध ने अमेरिकी रणनीति की कमजोरियों को भी जगजाहिर कर दिया है, जहां लंबे समय तक चलने वाले पारंपरिक या क्षेत्रीय संघर्षों से निपटने के लिए सेना पूरी तरह तैयार नहीं दिखती। इस जंग ने यह साबित कर दिया है कि केवल अत्याधुनिक तकनीक के भरोसे किसी लंबी और जटिल लड़ाई को आसानी से नहीं जीता जा सकता, बल्कि इसके लिए मजबूत जमीनी समर्थन और अटूट सप्लाई चेन की भी जरूरत होती है। इस पूरी रिपोर्ट ने वैश्विक पटल पर अमेरिका के अजेय होने के उस पुराने दावे को तगड़ा झटका दिया है जिस पर अब दुनियाभर में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
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