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ऐपल के ग्लोबल बिजनेस में बड़ा कब्जा जमाने की तैयारी में टाटा समूह

वैश्विक टेक बाजार और भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस समय एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक हलचल देखने को मिल रही है। भारत का सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद औद्योगिक घराना टाटा समूह (Tata Group) दुनिया की सबसे दिग्गज टेक कंपनी ऐपल (Apple) के ग्लोबल बिजनेस में अपनी हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ाने की आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है। आईफोन (iPhone) के केसिंग असेंबली में पहले ही अपनी मजबूत धमक बना चुका टाटा ग्रुप अब ऐपल के आईफोन के एनक्लोजर (Enclosures) और विभिन्न हाई-टेक कलपुर्जों (Components) के निर्माण में अपनी मौजूदगी का तेजी से विस्तार कर रहा है। टाटा का यह बड़ा कदम न केवल ऐपल की 'चीन प्लस वन' (China Plus One) रणनीति को नई उड़ान दे रहा है, बल्कि भारत को दुनिया का नया इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी मोड़ भी साबित हो रहा है।

आईफोन केसिंग से आगे बढ़कर एनक्लोजर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर टाटा का फोकस

ऐपल के सप्लाई चेन में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) की एंट्री कुछ साल पहले हुई थी, जब कंपनी ने तमिलनाडु के होसुर में आईफोन की केसिंग बनाने का प्लांट लगाया था। इसके बाद टाटा ने विस्ट्रॉन (Wistron) के भारतीय कारोबार का अधिग्रहण करके घरेलू स्तर पर आईफोन असेंबली की कमान भी संभाल ली थी। हालांकि, टाटा समूह का लक्ष्य केवल असेंबली तक सीमित रहना नहीं है। कंपनी अब आईफोन के हाई-प्रिसिजन मेटल एनक्लोजर, मैकेनिकल पार्ट्स और अन्य जटिल कलपुर्जों के निर्माण में अपनी क्षमता बढ़ा रही है। एनक्लोजर वह बाहरी ढांचा या बॉडी होती है जो आईफोन के भीतर मौजूद सभी संवेदनशील चिप्स, बैटरी और मदरबोर्ड को सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें ऐपल के बेहद कड़े मानकों और अत्याधुनिक सीएनसी (CNC) मशीनों की जरूरत होती है, जिसे टाटा अब भारत में ही बड़े पैमाने पर तैयार कर रहा है।

ऐपल की 'चीन प्लस वन' रणनीति और भारत का उभरता नया निर्माण तंत्र

पिछले कुछ वर्षों में चीन के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव, सख्त कोविड नीतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण ऐपल अपने वैश्विक उत्पादन को चीन से बाहर स्थानांतरित करने की कोशिशों में लगा हुआ है। इस स्थिति का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिल रहा है। ऐपल अपने कुल वैश्विक आईफोन उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा भारत में शिफ्ट कर रहा है और इस पूरी प्रक्रिया में टाटा समूह उसके सबसे प्रमुख और मजबूत भागीदार के रूप में उभरकर सामने आया है। टाटा द्वारा तमिलनाडु और कर्नाटक में स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में भारी-भरकम पूंजी निवेश किया जा रहा है। इन संयंत्रों में अत्याधुनिक मशीनों की तैनाती के साथ-साथ हजारों कुशल कर्मचारियों को ऐपल के कड़े गुणवत्ता मानकों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा रहा है।

स्थानीय रोजगार और 'मेक इन इंडिया' पहल को मिल रही अभूतपूर्व ताकत

टाटा समूह और ऐपल के बीच गहराते इस औद्योगिक संबंध का सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को मिल रहा है। आईफोन कंपोनेंट्स और एनक्लोजर निर्माण के विस्तार से तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। विशेष रूप से महिला कार्यबल को इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवसर दिए जा रहे हैं। भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने भी इस दिशा में एक उत्प्रेरक का काम किया है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है, बल्कि भारत द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्यात में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में सुपरपावर बनने की राह पर टाटा ग्रुप

ऐपल जैसी सख्त गुणवत्ता मानकों वाली वैश्विक कंपनी के साथ टाटा का यह बढ़ता दायरा यह साबित करता है कि भारतीय उद्योग जगत अब किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का विज़न केवल ऐपल के लिए कंपोनेंट्स सप्लाई करना ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में सेमीकंडक्टर (Semiconductor) और चिप पैकेजिंग के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाना है। जैसे-जैसे टाटा समूह आईफोन के एनक्लोजर और अन्य जटिल पार्ट्स का घरेलू स्तर पर निर्माण बढ़ाएगा, भारत में आईफोन की कुल उत्पादन लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। आने वाले वर्षों में टाटा और ऐपल का यह साझा सफर भारत को दुनिया की प्रमुख टेक सप्लाई चेन की रीढ़ की हड्डी के रूप में स्थापित कर देगा।