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‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के तहत ताबड़तोड़ एक्शन, 500 से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी हिरासत में

देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया विभागों ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अवैध रूप से सीमा पार कर देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ एक महाअभियान शुरू किया गया है, जिसे 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' का नाम दिया गया है। इस गुप्त और सुनियोजित ऑपरेशन के तहत सुरक्षाबलों ने एक साथ कई राज्यों में छापेमारी करते हुए अब तक 500 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों को हिरासत में ले लिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से देश विरोधी तत्वों और अवैध रूप से रह रहे लोगों के बीच हड़कंप मच गया है। क्या है खुफिया एजेंसियों का मास्टरप्लान 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' पिछले काफी समय से खुफिया एजेंसियों को इनपुट्स मिल रहे थे कि कई सीमावर्ती और महानगरों वाले इलाकों में अवैध रूप से आए विदेशी नागरिक फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे हैं। इनपुट्स के पुख्ता होते ही केंद्रीय जांच एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने मिलकर 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' को लॉन्च किया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर छिपे उन सभी लोगों की पहचान करना है जो बिना किसी वैध पासपोर्ट या वीजा के भारतीय सीमा में दाखिल हुए हैं और यहां के स्थानीय संसाधनों पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं। इस मिशन को बेहद गुप्त रखा गया था ताकि संदिग्धों को भागने का मौका न मिल सके। आधी रात को एक साथ कई ठिकानों पर दी गई दबिश सुरक्षाबलों और पुलिस की संयुक्त टीमों ने पूरी रणनीति के साथ आधी रात और अलसुबह के वक्त संदिग्ध बस्तियों, कंस्ट्रक्शन साइटों और झुग्गी-झोपड़ियों वाले इलाकों को चारों तरफ से घेर लिया। पूरी तरह से घेराबंदी करने के बाद जब दस्तावेजों की जांच शुरू की गई, तो भारी संख्या में लोग भारतीय नागरिकता का कोई भी वैध प्रमाण पत्र दिखाने में पूरी तरह नाकाम रहे। शुरुआती पूछताछ और कड़ाई से की गई जांच के बाद अब तक 500 से ज्यादा संदिग्धों को राउंडअप कर पुलिस थानों और डिटेंशन सेंटरों में भेजा जा चुका है, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जा रही है। फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी रैकेट का भी हुआ भंडाफोड़ इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान जो सबसे चौंकाने वाला और डराने वाला खुलासा हुआ है, वह है फर्जी दस्तावेजों का खेल। हिरासत में लिए गए कई संदिग्धों के पास से हुबहू असली दिखने वाले आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बरामद हुए हैं। जांच में पता चला है कि भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के बाद इन घुसपैठियों ने स्थानीय दलालों की मदद से कुछ ही दिनों में ये फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करवा लिए थे। पुलिस अब उन स्थानीय सिंडिकेट और दलालों के नेटवर्क को भी खंगाल रही है जो चंद रुपयों के लालच में देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से क्यों बेहद जरूरी है यह बड़ा क्रैकडाउन देश के वरिष्ठ रक्षा और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध घुसपैठ न केवल देश की जनसांख्यिकी (Demography) को प्रभावित करती है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक बहुत बड़ा टाइम बम है। कई बार इन अवैध बस्तियों का इस्तेमाल असामाजिक और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्लीपर सेल के रूप में किया जाता है। 'ऑपरेशन डेल्टा हंट' की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब घुसपैठ के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही हैं। आने वाले दिनों में इस अभियान के और तेज होने तथा हिरासत में लिए गए लोगों को वापस डिपोर्ट करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू होने की पूरी संभावना है।