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कनाडा के होंगे दो टुकड़े? ट्रंप प्रशासन और आजाद अल्बर्टा के बागियों के बीच गुप्त मीटिंग से हड़कंप

News India Live, Digital Desk: उत्तर अमेरिकी महाद्वीप में एक बड़े भू-राजनीतिक भूकंप की आहट सुनाई दे रही है। खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कनाडा के तेल समृद्ध प्रांत अल्बर्टा (Alberta) को देश से अलग करने की मांग कर रहे अलगाववादियों के साथ तीन बार ‘सीक्रेट मीटिंग’ की है। इस खुलासे के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए ‘संप्रभुता का सम्मान’ करने की नसीहत दी है।500 अरब डॉलर की मदद और ‘आजाद देश’ का सपना!’अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट’ (APP) नामक अलगाववादी समूह ने दावा किया है कि वे वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश और ट्रेजरी विभाग के अधिकारियों से मिल चुके हैं। बागियों ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि अगर अल्बर्टा में आजादी के लिए जनमत संग्रह (Referendum) सफल होता है, तो अमेरिका उन्हें $500 बिलियन (लगभग 42 लाख करोड़ रुपये) की क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराए। अलगाववादियों का तर्क है कि अमेरिका उनका ‘प्राकृतिक साझेदार’ है।ट्रंप के मंत्री का बयान: ‘अल्बर्टा के लोग अमेरिका जैसा बनना चाहते हैं’आग में घी डालने का काम अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के बयान ने किया है। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, “अल्बर्टा के पास अपार संसाधन हैं और वहां के लोग बहुत स्वतंत्र विचारों वाले हैं। चर्चा है कि वे जनमत संग्रह करा सकते हैं। लोग संप्रभुता चाहते हैं, वे वह पाना चाहते हैं जो अमेरिका के पास है।” इस बयान को कनाडा सरकार ने सीधे तौर पर अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना है।कनाडा में उबाल: ‘विदेशी धरती पर देश तोड़ने की साजिश राजद्रोह है’ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड ईबी ने इन गुप्त बैठकों को ‘राजद्रोह’ (Treason) करार दिया है। उन्होंने कहा कि एक विदेशी शक्ति की मदद से अपने ही देश को तोड़ने की कोशिश करना शर्मनाक है। वहीं, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हमेशा स्पष्ट रहा हूँ कि अमेरिका को कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।”क्यों अलग होना चाहता है अल्बर्टा? तेल और टैक्स का पेचकनाडा के कुल तेल उत्पादन का 85% हिस्सा अकेले अल्बर्टा से आता है। यहाँ के लोगों की मुख्य शिकायतें हैं:फेडरल टैक्स: उनका मानना है कि उनका पैसा ओटावा की सरकार ले जाती है और बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता।पाइपलाइन विवाद: संघीय सरकार द्वारा तेल पाइपलाइनों पर लगाए गए प्रतिबंधों से अल्बर्टा की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है।ट्रंप कार्ड: ट्रंप की वापसी के बाद वहां के अलगाववादियों को लग रहा है कि अमेरिका उन्हें अपने 51वें राज्य के रूप में या एक स्वतंत्र मित्र देश के रूप में स्वीकार कर सकता है।अमर उजाला विशेष: क्या होगा भारत पर असर?कनाडा में जारी यह अस्थिरता भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और वहां के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अगर कनाडा बिखरता है, तो उत्तरी अमेरिका की पूरी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बदल जाएगी। फिलहाल, अलगाववादी समूह 1.78 लाख सिग्नेचर जुटाने में लगा है ताकि जनमत संग्रह की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सके।