Friday , November 6 2026

करेंसी बाजार को सेबी का ‘बूस्टर डोज’: डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियम हुए आसान, अनहेजेड पोजीशन के लिए तय की गई 5 मिलियन डॉलर की सीमा

भारतीय वित्तीय बाजारों, विदेशी निवेश के गलियारों और शेयर बाजार के नियामकों से इस वक्त एक बहुत ही बड़ी, सकारात्मक और राहत भरी खबर सामने आ रही है। देश के प्रमुख पूंजी बाजार नियामक 'भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड' (SEBI) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर करेंसी डेरिवेटिव्स (Currency Derivatives) से जुड़े नियमों में बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सेबी ने नियमों को अधिक लचीला और सुगम बनाते हुए अनहेजेड करेंसी पोजीशन (Unhedged Currency Position) के लिए 5 मिलियन डॉलर की स्पष्ट सीमा तय कर दी है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए हालिया सर्कुलर के अनुसार, इस नए और दूरदर्शी फैसले से घरेलू निवेशकों के साथ-साथ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए भारतीय वित्तीय बाजारों में कारोबार करना और निवेश के रास्ते तलाशना बेहद आसान हो जाएगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि सेबी का यह कदम विदेशी और घरेलू निवेशकों का उत्साह बढ़ाने के लिए एक 'बूस्टर डोज' की तरह काम करेगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस नए बदलाव के क्या मायने हैं और इससे निवेशकों को क्या-क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं।

घरेलू निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को मिली बड़ी राहत

भारतीय करेंसी बाजार में लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से जुड़े कुछ कड़े नियमों की समीक्षा की जाए, ताकि बाजार में तरलता (Liquidity) बढ़ सके और निवेशकों को सुगमता हो सके। सेबी के इस नए फैसले के तहत अब घरेलू निवेशक और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) बिना किसी जटिलता के 5 मिलियन डॉलर तक की अनहेजेड भारतीय रुपया करेंसी पोजीशन आसानी से ले सकेंगे।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि 5 मिलियन डॉलर की यह निर्धारित सीमा किसी भी समय के आउटस्टैंडिंग एक्सपोजर (Outstanding Exposure) पर भी पूरी तरह से लागू होगी। इस सीमा की गणना करते समय सभी भारतीय रुपया करेंसी पेयर और अन्य विदेशी मुद्राओं के आंकड़ों को आपस में मिलाया जाएगा, तथा देश के सभी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर मौजूद कुल पोजीशन को एक साथ जोड़कर आंका जाएगा। नियामक के इस कदम से बाजार में पारदर्शिता भी आएगी और निवेशकों को अपनी जोखिम प्रबंधन योजनाओं (Risk Management Strategies) को बेहतर ढंग से लागू करने का अवसर मिलेगा।

शॉर्ट और लॉन्ग पोजीशन के लिए तय किए गए स्पष्ट और पारदर्शी नियम

भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक, विदेशी मुद्रा-भारतीय रुपया कॉन्ट्रैक्ट्स (Foreign Exchange-INR Contracts) के मामले में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) की शॉर्ट पोजीशन देश के किसी भी एक एक्सचेंज पर 5 मिलियन डॉलर की निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह नियम बाजार में अनावश्यक सट्टेबाजी को नियंत्रित करने और स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके विपरीत, यदि कोई एफपीआई 5 मिलियन डॉलर से अधिक की लॉन्ग पोजीशन (Long Position) लेना चाहता है, तो उसके पास भारतीय डेट (ऋण) या इक्विटी प्रतिभूतियों में अंडरलाइंग एक्सपोजर (Underlying Exposure) का होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह भी प्रावधान किया गया है कि इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड यूनिट्स को भी एफपीआई के लिए अंडरलाइंग एक्सपोजर के रूप में पूरी तरह से मान्य किया जाएगा। दूसरी ओर, घरेलू क्लाइंट्स आरबीआई द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाने वाली शर्तों और नियमों के अधीन रहकर 5 मिलियन डॉलर से अधिक की पोजीशन ले सकेंगे, जिससे उन्हें अपने कारोबार के विस्तार में बड़ी मदद मिलेगी।

विदेशी निवेशकों के लिए केवाईसी (KYC) प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल, भारत में भौतिक रूप से आने की नहीं होगी जरूरत

करेंसी डेरिवेटिव्स के नियमों को आसान बनाने के अलावा, सेबी ने पिछले दिनों निवेशकों के लिए एक और बहुत बड़ा ऐतिहासिक सुधार किया है। नियामक ने भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों (PROI) यानी अप्रवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों के लिए 'नो योर कस्टमर' यानी केवाईसी (KYC) से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण ढील दी है। इस नए बदलाव के तहत, वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF – Financial Action Task Force) के नियमों का पूरी तरह से अनुपालन करने वाले देशों में रहने वाले पात्र विदेशी निवेशक अब भारत में शारीरिक रूप से उपस्थित हुए बिना ही पूरी तरह से डिजिटल माध्यम (Digital Mode) से अपनी केवाईसी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर सकेंगे।

सरकार और सेबी के इस कदम का मुख्य उद्देश्य अनिवासी भारतीयों (NRIs), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCIs) और अन्य विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय वित्तीय बाजारों, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने की प्रक्रिया को बेहद आसान और झंझटमुक्त बनाना है। हालांकि, निवेशकों की सुरक्षा और नियमों की अनुपालना को देखते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो निवेशक एफएटीएफ (FATF) के नियमों का अनुपालन न करने वाले देशों में निवास करते हैं, उन पर केवाईसी की पुरानी और मौजूदा आवश्यकताएं पहले की तरह ही सख्ती से लागू रहेंगी।

निवेशकों के विश्वास को मजबूत करेगा सेबी का यह दूरदर्शी कदम

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी और आरबीआई द्वारा उठाए गए ये कदम भारतीय वित्तीय बाजार को वैश्विक मानकों के और अधिक करीब लाने का काम कर रहे हैं। जिस प्रकार से वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया भर के निवेशकों के लिए एक सुरक्षित और आकर्षक ठिकाना बनकर उभर रही है, ऐसे में करेंसी डेरिवेटिव्स के नियमों का आसान होना और केवाईसी प्रक्रिया का डिजिटल होना विदेशी पूंजी के प्रवाह (Foreign Capital Inflow) को और तेज करेगा।

डेरिवेटिव्स बाजार में 5 मिलियन डॉलर की स्पष्ट सीमा तय होने से अनिश्चितता के बादल छटेंगे और संस्थागत निवेशकों को एक स्पष्ट विनियामक ढांचा (Regulatory Framework) मिलेगा। कुल मिलाकर, सेबी का यह 'बूस्टर डोज' भारतीय मुद्रा बाजार को अधिक गतिशील, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मील का पत्थर साबित होने वाला है, जिससे आने वाले दिनों में देश के वित्तीय बाजारों में निवेश का एक नया दौर देखने को मिल सकता है।