News India Live, Digital Desk: बिहार का सीमावर्ती जिला किशनगंज इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा के बेहद करीब स्थित यह इलाका फर्जी आधार कार्ड (Fake Aadhaar Card) बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक जुड़े हुए हैं। हालिया जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह के निशाने पर मुख्य रूप से घुसपैठिए (Infiltrators) हैं, जिन्हें भारतीय नागरिकता का जाली कवच पहनाया जा रहा है।सरपंच और हेडमास्टर की मुहरों का खेलकिशनगंज के टेढ़ागाछ और गलगलिया जैसे इलाकों में पुलिस और एसएसबी (SSB) की छापेमारी में इस काले धंधे की परतें खुली हैं। गिरोह के पास से भारी संख्या में ग्राम प्रधान, सरपंच और स्कूलों के प्रधानाध्यापकों की फर्जी मुहरें और लेटरपैड बरामद किए गए हैं। इन जाली दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के निवास प्रमाण पत्र बनाए जाते थे, जिनका उपयोग बाद में आधार कार्ड बनवाने के लिए किया जाता था। एक हालिया रेड में एक किराना दुकान से 400 से अधिक संदिग्ध आधार कार्ड और आवेदन मिले हैं।बंगाल से यूपी तक फैला ‘सीमांचल नेटवर्क’सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह एक सुव्यवस्थित नेटवर्क है जिसे ‘सीमांचल नेटवर्क’ कहा जा रहा है। पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर और मालदा से घुसपैठियों को किशनगंज लाया जाता है। यहां उनके जाली दस्तावेज तैयार होते हैं और फिर उन्हें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में मजदूरी या घरेलू काम के बहाने भेज दिया जाता है। फर्जी आधार कार्ड के दम पर ये घुसपैठिए न केवल जमीनें खरीद रहे हैं, बल्कि बैंक खाते खुलवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ भी ले रहे हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) के लिए एक गंभीर चुनौती है।आधार कार्ड के जरिए ‘पहचान की चोरी’जांच में यह भी पाया गया है कि गिरोह उन लोगों की पहचान का इस्तेमाल करता है जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो बहुत गरीब हैं। उनके फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली (Iris Scan) के डेटा में हेरफेर कर घुसपैठियों की फोटो लगा दी जाती है। एसएसबी ने हाल ही में भारत-नेपाल सीमा के पास एक ऐसे बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जिसके पास किशनगंज के पते वाला असली जैसा दिखने वाला फर्जी आधार कार्ड था। पूछताछ में उसने कुबूल किया कि उसने मात्र 5 से 10 हजार रुपये में यह दस्तावेज बनवाया था।सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट: अब बायोमेट्रिक पर कड़ी नजरइस बड़े खुलासे के बाद यूआईडीएआई (UIDAI) और केंद्रीय जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। किशनगंज और आसपास के आधार केंद्रों की विशेष ऑडिटिंग (Auditing) शुरू कर दी गई है। संदिग्ध पाए गए हजारों आधार कार्डों को ब्लॉक करने की प्रक्रिया चल रही है। जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी नए आधार कार्ड के लिए भौतिक सत्यापन (Physical Verification) अनिवार्य होगा। घुसपैठ के इस ‘डिजिटल रास्ते’ को बंद करने के लिए सीमा पर चौकसी और तकनीक दोनों को अपग्रेड किया जा रहा है।
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