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कुशीनगर बौद्ध भिक्षु संघ के अध्यक्ष भदंत ज्ञानेश्वर का महापरिनिर्वाण, 10 नवंबर के बाद होगा अंतिम संस्कार

News India Live, Digital Desk : भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर आज शोक में डूबी है। अखिल भारतीय भिक्षु संघ की कुशीनगर इकाई के अध्यक्ष और लाखों बौद्ध अनुयायियों के पथ प्रदर्शक, भदंत ज्ञानेश्वर का गुरुवार को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके महापरिनिर्वाण (निधन) की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।10 नवंबर के बाद क्यों होगा अंतिम संस्कार?भदंत ज्ञानेश्वर के निधन के बाद सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह सामने आई है कि उनका अंतिम संस्कार 10 नवंबर के बाद ही किया जाएगा। लोगों के मन में यह सवाल है कि अंतिम संस्कार में इतनी देरी क्यों की जा रही है।दरअसल, भदंत ज्ञानेश्वर की ख्याति और उनके अनुयायियों का दायरा सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं था, बल्कि म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड जैसे कई बौद्ध देशों में भी उनके लाखों शिष्य और अनुयायी हैं। उनके अंतिम दर्शन करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए देश और दुनिया के कोने-कोने से भिक्षुओं और अनुयायियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। सभी को उनके अंतिम दर्शन का अवसर मिल सके, इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है कि उनकी पार्थिव देह को कुछ दिनों के लिए अंतिम दर्शन हेतु रखा जाएगा।बुद्ध मंदिर में रखे गए पार्थिव शरीरउनके पार्थिव शरीर को अनुयायियों के अंतिम दर्शन के लिए कुशीनगर स्थित महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर के बुद्ध विहार में रखा गया है। यहां भिक्षुओं द्वारा निरंतर पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार किया जा रहा है। उनके निधन की खबर मिलते ही स्थानीय नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और हजारों की संख्या में आम लोगों ने पहुंचकर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।कौन थे भदंत ज्ञानेश्वर?भदंत ज्ञानेश्वर बौद्ध धर्म के एक महान और पूजनीय संत थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार और मानव सेवा में समर्पित कर दिया। उनका स्वभाव बेहद सरल और सौम्य था। कुशीनगर में बौद्ध धर्म के केंद्र को बनाए रखने और यहां की गतिविधियों के संचालन में उनकी भूमिका अतुलनीय थी। उनका जाना न केवल कुशीनगर, बल्कि पूरे बौद्ध जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।