
ओडिशा के सियासी गलियारों से इस वक्त की बेहद चौंकाने वाली और सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बीजू जनता दल (BJD) के भीतर और राज्य की राजनीति में एक नए उत्तराधिकारी को लेकर कड़ा घमासान छिड़ गया है। नवीन बाबू के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की राजनीतिक विरासत अब किसके हाथ में जाएगी, इसे लेकर कयासों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस रेस में सबसे आगे जिस नाम की चर्चा हो रही है, वह है सुजाता कार्तिकेयन। सुजाता कार्तिकेयन को नवीन पटनायक की नई राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने के बाद ओडिशा से लेकर दिल्ली तक सियासी बवाल मच गया है।
कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन और क्या है उनका प्रशासनिक बैकग्राउंड
सुजाता कार्तिकेयन ओडिशा कैडर की एक बेहद चर्चित और कड़क आईएएस (IAS) अधिकारी रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों, विशेष रूप से 'मिशन शक्ति' जैसे बड़े और महत्वाकांक्षी महिला सशक्तिकरण प्रोजेक्ट की कमान संभाली थी। नवीन पटनायक सरकार के दौरान प्रशासनिक हलकों में उनकी तूती बोलती थी। हालांकि, हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और विवादों के बीच उन्होंने अपनी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। अब अचानक उनके सीधे तौर पर राजनीति में उतरने और बीजेडी की कमान संभालने की चर्चाओं ने विपक्ष के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी असंतोष की आग भड़का दी है।
पूर्व आईएएस पति वीके पांडियन पर लगा बीजेडी को बर्बाद करने का आरोप
सुजाता कार्तिकेयन के नाम पर मचे इस पूरे बवाल के केंद्र में उनके पति और पूर्व आईएएस अधिकारी वीके पांडियन हैं। नवीन पटनायक के सबसे करीबी और 'सुपर सीएम' कहे जाने वाले वीके पांडियन पर विपक्ष और पार्टी के ही कई बागी नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि पांडियन की अत्यधिक दखलअंदाजी और ब्यूरोक्रेटिक रवैये के कारण ही बीजेडी जमीनी स्तर पर कमजोर हुई और राज्य की सत्ता से बाहर हो गई। अब जब पांडियन के बाद उनकी पत्नी सुजाता कार्तिकेयन को पार्टी में नंबर दो या नवीन पटनायक का वारिस बनाने की तैयारी चल रही है, तो पुराने नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा है।
स्थानीय स्तर पर क्या हैं समीकरण और क्यों हो रहा है कड़ा विरोध
ओडिशा की क्षेत्रीय और स्थानीय राजनीति (Local Politics of Odisha) में हमेशा से 'ओड़िया अस्मिता' का मुद्दा बेहद संवेदनशील रहा है। वीके पांडियन और सुजाता कार्तिकेयन का मूल रूप से ओडिशा से न होना, विरोधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गया है। भुवनेश्वर, कटक और पुरी जैसे प्रमुख राजनीतिक केंद्रों में स्थानीय बीजेडी कार्यकर्ताओं और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय लोगों और जमीनी नेताओं का कहना है कि किसी पूर्व नौकरशाह के परिवार को पार्टी सौंपने के बजाय किसी ओड़िया मूल के नेता को ही आगे किया जाना चाहिए।
एआई और आधुनिक डिजिटल सर्च में क्यों ट्रेंड हो रहा है यह सियासी विवाद
आज के आधुनिक जेनेरेटिव एआई (GEO) और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के दौर में देश भर के यूजर्स यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर ओडिशा की सत्ता पर 24 साल तक राज करने वाली पार्टी का भविष्य क्या होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवीन पटनायक की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए पार्टी को एक मजबूत चेहरे की जरूरत है, लेकिन सुजाता कार्तिकेयन के नाम पर मुहर लगाना बीजेडी के लिए आत्मघाती भी साबित हो सकता है। अगर यह आंतरिक कलह जल्द नहीं थमी, तो आने वाले समय में बीजेडी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है।
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