Saturday , July 18 2026

कौन हैं IAS कुंदन कुमार? जिनके इस नायाब बिजनेस मॉडल पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी लगा दी मुहर

बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में अपने लीक से हटकर फैसलों और जनहित के कार्यों के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी कुंदन कुमार (IAS Kundan Kumar) एक बार फिर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर, बेतिया और पूर्णिया समेत पूरे बिहार के प्रशासनिक और व्यापारिक गलियारों में इस वक्त कुंदन कुमार के एक बेहतरीन आइडिया (Idea) की जमकर सराहना हो रही है। इस नायाब मॉडल को जमीनी स्तर पर इतनी सफलता मिली है कि खुद सूबे के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Deputy CM Samrat Choudhary) ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। अब इसे पूरे बिहार में एक बड़े प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की तैयारी की जा रही है, जो बिहार से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने में गेम चेंजर साबित होने वाला है।

आखिर कौन हैं आईएएस कुंदन कुमार और क्यों होती है इनके काम की तारीफ?

साल 2012 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी कुंदन कुमार की गिनती राज्य के सबसे विजनरी और मेहनती अफसरों में की जाती है। वे जिस भी जिले में तैनात रहे हैं, वहां उन्होंने स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई क्रांतिकारी काम किए हैं। इससे पहले पश्चिम चम्पारण (बेतिया) के जिलाधिकारी (DM) रहते हुए उन्होंने कोरोना काल के दौरान लौटे प्रवासी मजदूरों के हुनर को पहचान कर 'स्टार्टअप जोन चनपटिया' (Chanpatia Startup Zone) की नींव रखी थी। चनपटिया मॉडल की गूंज देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक सुनाई दी थी, जहां स्थानीय मजदूरों द्वारा बनाए गए कपड़े और जूते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक निर्यात होने लगे थे। अब उनके नए इनोवेटिव आइडिया ने एक बार फिर सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

क्या है वह अनोखा मॉडल जिस पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने लगाई मुहर?

आईएएस कुंदन कुमार का यह नया मॉडल स्थानीय स्तर पर लघु उद्योगों, सूक्ष्म व्यापारों (Micro Businesses) और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को मुख्यधारा के बाजार और आधुनिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर आधारित है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जो राज्य के विकास और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, उन्हें यह प्रेजेंटेशन बेहद पसंद आया। इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि इसमें बहुत कम पूंजी निवेश के साथ भारी संख्या में लोगों को घर बैठे रोजगार दिया जा सकता है। सम्राट चौधरी ने इस मॉडल को हरी झंडी देते हुए विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इसे बिना किसी देरी के राज्य के सभी 38 जिलों में लागू करने का रोडमैप तैयार करें।

पूरे बिहार में लागू होने से कैसे बदलेगी राज्य के युवाओं की तकदीर?

इस मॉडल के पूरे बिहार में लागू होने से राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों की बाढ़ आने की उम्मीद है। बिहार में हुनरमंद कामगारों और कारीगरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही बाजार और वित्तीय मदद न मिल पाने के कारण पलायन का रास्ता चुनना पड़ता था। कुंदन कुमार का यह मॉडल इन कारीगरों को सीधे बड़े खरीदारों और डिजिटल मार्केटिंग टूल्स से जोड़ेगा, जिससे बिचौलियों का खेल खत्म हो जाएगा और उत्पादकों को सीधे उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा। यह मॉडल महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

प्रशासनिक अफसरों के लिए प्रेरणास्रोत बना आईएएस कुंदन कुमार का काम

बिहार की नौकरशाही में कुंदन कुमार के इस बेहतरीन काम को एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है। अन्य जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस मॉडल का अध्ययन करने और इसे अपने क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार ढालने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। खेल, कृषि, कला और कपड़ा उद्योग जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े लोगों को इस क्रांतिकारी योजना के लागू होने का बेसब्री से इंतजार है। सरकार की इस मंजूरी के बाद यह साफ हो गया है कि बिहार अब केवल श्रम शक्ति भेजने वाला राज्य नहीं, बल्कि अपने ही दम पर आत्मनिर्भर बनने की राह पर तेजी से कदम बढ़ा चुका है।